
नईदुनिया न्यूज, बिश्रामपुर: एसईसीएल के बिश्रामपुर क्षेत्र की गायत्री भूमिगत खदान में कथित जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली को लेकर कामगारों में असंतोष गहराने लगा है। कोयला कामगारों ने ड्यूटी के निर्धारित समय में खदान के भीतर रहकर उत्पादन एवं सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय कैंटीन में बैठकर शतरंज खेलने और मनोरंजन करने का आरोप लगाया है।
वहीं, दूसरी ओर कामगारों पर अनावश्यक दबाव बनाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। इससे खदान के अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। कामगारों का आरोप है कि गायत्री भूमिगत खदान में सुबह सात बजे से दोपहर तीन बजे तक ड्यूटी करने वाले कुछ कथित ओवरमैन एवं माइनिंग सरदार निर्धारित आठ घंटे की ड्यूटी के दौरान अधिकांश समय खदान के कैंटीन में बैठकर शतरंज खेलने में बिताते हैं।
आरोप है कि संबंधित अधिकारी-कर्मचारी खदान के भीतर निरीक्षण एवं कार्यों की निगरानी के लिए महज दो घंटे ही जाते हैं, जबकि शेष समय कैंटीन में मनोरंजन करते नजर आते हैं।कामगारों का कहना है कि भूमिगत खदान में उत्पादन के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होती है। खदान के भीतर कार्यरत श्रमिकों की गतिविधियों की निगरानी, सुरक्षा उपायों का परीक्षण और कार्यस्थल पर संभावित खतरों को लेकर सतर्कता बरतना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
ऐसे में यदि जिम्मेदार अधिकारी ड्यूटी के दौरान खदान के भीतर पर्याप्त समय नहीं देते हैं तो इससे सुरक्षा संबंधी निगरानी प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। विडंबना यह है कि एक ओर कामगारों से बेहतर उत्पादन और निर्धारित लक्ष्य हासिल करने का दबाव बनाया जाता है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं कामगारों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी ड्यूटी के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
कामगारों ने प्रबंधन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, ड्यूटी के दौरान अधिकारियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की निगरानी करने तथा अनावश्यक दबाव एवं कथित मानसिक प्रताड़ना पर रोक लगाने की मांग की है।
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