शिक्षकों से रिश्वत मांगने पर सीतापुर BEO को नोटिस, DEO ने 2 दिन में मांगा जवाब, होगी कार्रवाई
सरगुजा जिले के सीतापुर विकासखंड शिक्षा कार्यालय में शिक्षकों से काम के बदले राशि मांगने और आवेदन गायब करने के मामले में डीईओ डॉ. दिनेश कुमार झा ने प्र...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 04:50:55 PM (IST)Updated Date: Sun, 27 Sep 2026 04:50:55 PM (IST)
HighLights
- फाइलें गायब कर अटकाया वेतन और नियमितीकरण, सीतापुर बीईओ को डीईओ ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
- टीचर्स एसोसिएशन के कड़े तेवर के बाद बैकफुट पर बीईओ, सरगुजा डीईओ ने 4 बिंदुओं पर मांगा जवाब
- आवक-जावक बंद कर लीपापोती का आरोप, सीतापुर बीईओ के खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी जारी
नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर: विकासखंड शिक्षा कार्यालय सीतापुर में भ्रष्टाचार और लापरवाही की लगातार शिकायतों के बाद आखिरकार जिला शिक्षा अधिकारी ने विकास खंड शिक्षा अधिकारी से जबाब मांगा है। जिला शिक्षा अधिकारी डा दिनेश कुमार झा ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिवस के भीतर जवाब तलब किया है।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी की पदस्थापना कुछ माह पहले ही हुई है। वे प्रभारी के रूप में काम कर रहे हैं।छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की शिकायत के बाद बीईओ को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। एसोसिएशन ने डीईओ के समक्ष शिकायत की थी कि सीतापुर ब्लॉक के शिक्षकों से कार्यालयीन कार्यों के एवज में राशि की मांग की जा रही है।
डीईओ द्वारा जारी नोटिस में चार प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। इसमें अर्जित अवकाश और मेडिकल अवकाश की स्वीकृति तथा वेतन भुगतान के मामले पांच-छह माह से लेकर एक वर्ष तक लंबित हैं। आरोप है कि इनके निराकरण के लिए दो लिपिक और स्वयं बीईओ द्वारा राशि की मांग की जाती है। कई शिक्षकों के अवकाश आवेदन और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट कार्यालय से गायब होने की शिकायत है।
संबंधित लिपिकों और बीईओ द्वारा आवक-जावक में आवेदन लेने से मना किया जाता है, जिससे शिक्षकों को पावती तक नहीं मिल पा रही है। परिवीक्षा अवधि पूर्ण कर चुके पात्र शिक्षकों के नियमितीकरण प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजने, परीक्षा अनुमति आदेश देने, सर्विस बुक संधारण और जीपीएफ पासबुक अद्यतन करने में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है और इसके लिए भी राशि मांगी जा रही है।
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नोटिस में डीईओ ने स्पष्ट कहा है कि यदि इस प्रकार का आचरण कार्यालयीन कार्यों में लाया जा रहा है तो यह घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के विपरीत है।डीईओ ने बीईओ को निर्देशित किया है कि क्यों न आपके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाए। अपना पक्ष दो दिन के भीतर स्वयं उपस्थित होकर प्रस्तुत करें, अन्यथा एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी, जिसकी जवाबदेही स्वयं बीईओ की होगी।