अंबिकापुर में भाजपा नेता पर ST-SC एक्ट के तहत केस दर्ज, महिला के चरित्र और आदिवासी समाज पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप
यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाने वाली महिला के चरित्र पर सार्वजनिक टिप्पणी करने और आदिवासी समाज पर अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में भाजपा नेता व कैट के प्रदे...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 02:01:55 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 02:02:37 PM (IST)
HighLights
- यौन दुर्व्यवहार की घटना पर सिटी कोतवाली में केस दर्ज हुआ था
- कैट सरगुजा के पदाधिकारियों ने केस खत्म करने की मांग की थी
- रविंद्र तिवारी के बयान की वीडियो-ऑडियो जब्त कर जांच की जाए
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाने वाली महिला के चरित्र पर सार्वजनिक टिप्पणी करने और आदिवासी समाज पर अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में भाजपा नेता व कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश उपाध्यक्ष रविंद्र तिवारी के खिलाफ अजाक थाने में केस दर्ज किया गया है।
भाजपा नेता रविंद्र के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1), 353(2) और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं।
यौन दुर्व्यवहार की घटना पर सिटी कोतवाली में केस दर्ज हुआ था
सर्व आदिवासी समाज महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष सुनीहा सोनहा की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया गया है कि 11 अगस्त को शहर की एक दुकान में आदिवासी महिला के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार की घटना पर सिटी कोतवाली में केस दर्ज हुआ था।
कैट सरगुजा के पदाधिकारियों ने केस खत्म करने की मांग की थी
इसी प्रकरण में कैट सरगुजा के पदाधिकारियों ने एसएसपी को ज्ञापन देकर केस खत्म करने की मांग की थी। आरोप है कि ज्ञापन देने के बाद रविंद्र तिवारी ने सार्वजनिक रूप से पीड़िता पर आरोप लगाया कि वह शंकरगढ़ थाने में भी पहले इस तरह का कृत्य कर चुकी है।
आदिवासी समाज के लोग शासन से मिलने वाली राशि के लालच में एट्रोसिटी एक्ट का केस लगाते हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस बयान से पीड़िता के चरित्र और पूरे आदिवासी समाज की गरिमा को ठेस पहुंची है तथा निष्पक्ष विवेचना को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है।
रविंद्र तिवारी के बयान की वीडियो-ऑडियो जब्त कर जांच की जाए
मांग की गई है कि शंकरगढ़ थाने के अभिलेख से सत्यापित किया जाए कि पीड़िता के खिलाफ पहले कोई शिकायत है या नहीं, रविंद्र तिवारी के बयान की वीडियो-ऑडियो जब्त कर जांच की जाए और प्रकरण में महिला का पूरक कथन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य सुरक्षित कर निष्पक्ष विवेचना की जाए।