सूरजपुर - अब किताबों तक सीमित नहीं रहेगी भाषा: जिले के सभी शासकीय स्कूलों में शुरू हुआ शब्दबीज नवाचार
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की भाषा और अभिव्यक्ति क्षमता को मजबूत करने के लिए एक अभिनव पहल 'शब्दबीज' की शुरुआत की ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 09:49:53 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 09:49:53 PM (IST)
शब्दबीज अभियान के तहत बच्चे सीख रहे नए-नए शब्द फोटो जनसंपर्कHighLights
- सूरजपुर के प्राइमरी स्कूलों में ‘शब्दबीज’ नवाचार शुरू हुआ।
- रोज एक नया शब्द सीखेंगे नौनिहाल, बढ़ेगा शब्द भंडार।
- कलेक्टर रेना जमील के मार्गदर्शन में पहल शुरू हुई।
नईदुनिया प्रतिनिधि, सूरजपुर: प्राथमिक कक्षाओं में कई बच्चे शब्द पढ़ तो लेते हैं, लेकिन उन्हें बातचीत में इस्तेमाल करने या अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में झिझकते हैं। इसी चुनौती को दूर करने के लिए सूरजपुर जिले के सभी शासकीय प्राथमिक विद्यालयों में ‘शब्दबीज’ शैक्षिक नवाचार शुरू किया गया है। इसके तहत बच्चे प्रतिदिन एक नए शब्द को केवल याद नहीं करेंगे, बल्कि उसका अर्थ समझकर सही उच्चारण, वाक्य निर्माण और रोजमर्रा की बातचीत में उसका प्रयोग करना भी सीखेंगे।
जिला प्रशासन और समग्र शिक्षा की इस पहल का उद्देश्य बच्चों की भाषा को मजबूत करने के साथ उनमें आत्मविश्वास और स्वतंत्र अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करना है। कलेक्टर रेना जमील के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस नवाचार में भाषा सीखने की प्रक्रिया को किताबों और कक्षा के अभ्यास तक सीमित रखने के बजाय बच्चों के दैनिक जीवन से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
इसकी मूल अवधारणा है कि हर बच्चा हर दिन एक नया शब्द सीखे और धीरे-धीरे उसे अपनी बोलचाल का हिस्सा बनाए। इसके लिए शिक्षकों को नियमित शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को शब्दों से परिचित कराने और उनका व्यवहारिक उपयोग सिखाने की भूमिका निभानी होगी।
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शब्दबीज की खासियत यह है कि इसमें शब्द सीखने के कई चरण निर्धारित किए गए हैं। बच्चे पहले नए शब्द को सुनेंगे, फिर उसका सही उच्चारण करेंगे। इसके बाद अर्थ समझने, शब्द को पढ़ने-लिखने, उससे वाक्य बनाने और अपने अनुभवों के आधार पर उसका इस्तेमाल करने का अभ्यास करेंगे। इस प्रक्रिया से बच्चों को केवल शब्दों की पहचान कराने के बजाय भाषा को समझने और उसे व्यवहार में उतारने का अवसर मिलेगा।
शिक्षक की भूमिका होगी महत्वपूर्ण- इस पहल को प्रभावी बनाने में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी अहम होगी। शिक्षक बच्चों को नए शब्दों का अर्थ और उच्चारण समझाने के साथ उनसे वाक्य बनवाएंगे, सवाल पूछने के लिए प्रेरित करेंगे और बातचीत के अवसर उपलब्ध कराएंगे। बच्चों को अपनी बात कहने और अनुभव साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि वे बिना झिझक अपनी अभिव्यक्ति कर सकें।