
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर : सरगुजा जिले के लखनपुर जनपद के अमदला गांव में रहने वाले बलिदानी जवान के बुजुर्ग माता-पिता ने अपनी एएसआइ बहू पर उन्हें बेसहारा छोड़ देने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज, कलेक्टर सरगुजा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा को शिकायत पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।उनका आरोप है कि बेटे के बलिदान होने के बाद बहू ने उनका साथ छोड़ दिया जबकि बेटे के बदले ही उन्हें अनुकंपा नियुक्ति मिली है।
जानकारी के अनुसार अमदला निवासी रामशंकर सिंह स्पेशल टास्क फोर्स में पदस्थ थे। तीन मार्च 2021 को बीजापुर जिले में माओवादियों से हुई मुठभेड़ में वे बलिदान हो गए थे। बलिदान के समय उनकी कोई संतान नहीं थी।शासन की ओर से उनकी पत्नी को पुलिस अधीक्षक कार्यालय अंबिकापुर में सहायक उप निरीक्षक (एम) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी।
साथ ही आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई थी। बलिदानी जवान के पिता बुध राम (76) और माता दुलारो बाई (68) ने आरोप लगाया है कि बहू को नौकरी मिलने के बाद उसने उनसे पूरी तरह नाता तोड़ लिया है। वह न तो उनकी देखभाल कर रही है और न ही कोई आर्थिक मदद कर रही है।
बुजुर्ग माता-पिता का आरोप है कि नौकरी मिलने के बाद बहू ने अंबिकापुर में अलग घर बनवा लिया है और वहीं निवास कर रही है, जबकि उनके बलिदानी बेटे द्वारा बनवाए गए मकान में ताला लगा दिया गया है। अब वह ससुराल आती-जाती भी नहीं है।इस कारण दोनों बुजुर्गों को अपने छोटे बेटे जय सिंह के साथ कठिन परिस्थितियों के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
छोटा बेटा मजदूरी और खेती-किसानी कर उनका भरण-पोषण कर रहा है।शिकायत में बुजुर्ग माता-पिता ने आरोप लगाया है कि बेटे के बलिदान के बाद शासन से आर्थिक सहायता मिलने की जानकारी उन्हें मिली थी, जबकि बहू ने उन्हें कम राशि मिलने की बात बताई है।
उनका आरोप है कि बलिदान के बाद मिली सहायता राशि और वेतन से बहू ने कार, स्कूटी, ट्रैक्टर, बाइक, जमीन और बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी संपत्तियां बना ली हैं, लेकिन बुजुर्ग माता-पिता की कोई सुध नहीं ले रही है।माता-पिता ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके पास बलिदानी बेटे का आधार कार्ड, बलिदान प्रमाण पत्र और आश्रित परिवार सूची जैसे जरूरी दस्तावेज तक नहीं हैं। कई बार मांगने के बाद भी बहू ने दस्तावेजों की प्रतियां उन्हें उपलब्ध नहीं कराई हैं।
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बलिदानी जवान के छोटे भाई जय सिंह ने कहा है कि बड़े भाई ने जो मकान बनवाया था, उसकी चाबी माता-पिता को मिलनी चाहिए। भाभी अपनी सैलरी का आधा हिस्सा माता-पिता को दे, ताकि बुजुर्ग माता-पिता का भरण-पोषण हो सके, क्योंकि वह नौकरी और पैसे मिलने के बाद उन्हें छोड़कर चली गई है। उनकी नौकरी भी उनके भाई के आधार पर मिली है।
बुजुर्ग दंपती ने पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत में कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति परिवार की देखभाल की शर्त पर दी गई थी, लेकिन शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति की शर्तों की जांच कराने, घर में प्रवेश दिलाने और देखभाल के लिए जिम्मेदार बनाने की मांग की है।इस मामले में बलिदानी जवान की पत्नी का पक्ष लेने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो पाने से उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
यह प्रकरण संज्ञान में है। यह विशुद्ध पारिवारिक प्रकरण है। पुलिस परिवार से जुड़ा होने के कारण प्रयास किया जा रहा है कि दोनों पक्ष के बीच आपसी समझौते से समस्या का समाधान हो जाए और किसी पक्ष को कोई परेशानी न हो। राजेश अग्रवाल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा