
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर : तीन से चार दशक तक एसईसीएल समेत कोल इंडिया के सहायक कंपनियों की कोयला खदानों में सेवा देने वाले सेवानिवृत्त कोलकर्मियों को क्वार्टर लीज पर मिलने की उम्मीद अब एक और बड़े पड़ाव पर पहुंच गई है। सरप्लस क्वार्टरों के गेनफुल यूटिलाइजेशन का मामला अब केवल कोल इंडिया के स्तर पर तय होने वाला नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, कोल इंडिया ने जिस जमीन पर ये आवास बनाए हैं, वह स्वयं भारत सरकार से लीज पर ली गई है। ऐसे में क्वार्टरों को लीज पर देने का अंतिम अधिकार भारत सरकार के स्तर पर ही तय होगा। सब कमेटी की रिपोर्ट के बाद प्रस्ताव को कोयला मंत्रालय के माध्यम से संबंधित मंत्रालय और फिर कैबिनेट तक भेजे जाने की संभावना है।
इस मामले को लेकर जेबीसीसीआइ मानकीकरण कमेटी ने वर्ष 2024 में आठ सदस्यीय सब कमेटी गठित की थी। इसमें कोल इंडिया के अधिकारियों के साथ बीएमएस, एचएमएस, एटक और सीटू के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। लोकसभा चुनाव के दौरान पहली बैठक धनबाद में हुई, लेकिन आचार संहिता के कारण निर्णय नहीं हो सका। इसके बाद कोलकाता और दिल्ली में बैठकें हुईं। सब कमेटी ने सभी अनुषंगी कंपनियों से क्वार्टरों के प्रकार, सरप्लस आवास और अवैध कब्जे वाले क्वार्टरों की जानकारी मांगी।
कंपनियों ने सूची उपलब्ध करा दी। 10 सितंबर को रांची में सब कमेटी की चौथी बैठक हुई। इसके बाद सदस्यों ने सीसीएल के बड़का-सयाल, रजरप्पा एरिया और बीसीसीएल का दौरा कर सरप्लस क्वार्टरों की वास्तविक स्थिति देखी। अब पांचवीं और अंतिम बैठक एक माह के भीतर कोलकाता में प्रस्तावित है। इसमें निरीक्षण और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर जेबीसीसीआइ मानकीकरण कमेटी को सौंपी जाएगी।
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रिपोर्ट के बाद मंत्रालय और कैबिनेट की भूमिका
सब कमेटी सदस्य शिव कुमार यादव ने कहा कि एक माह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का प्रयास है। रिपोर्ट जेबीसीसीआइ मानकीकरण में रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि जमीन भारत सरकार से लीज पर होने के कारण अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर होगा। कोल इंडिया रिपोर्ट कोयला मंत्रालय को भेजेगी और आगे संबंधित मंत्रालय के माध्यम से प्रस्ताव कैबिनेट तक पहुंच सकता है। इसके बाद ही क्वार्टर लीज का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।