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सूरजपुर में 14 लोगों की जान ले चुके 'कबरा' हाथी की दहशत, रोड पर बैरियर लगाकर आवाजाही रोकी

सूरजपुर के प्रतापपुर में 14 लोगों की जान ले चुके 'कबरा' हाथी और 13 हाथियों के दल की मौजूदगी के कारण वन विभाग ने बगड़ा-बंशीपुर सड़क बंद कर दी है।

By Anang Pal DixitEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 04:56:56 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 04:56:56 PM (IST)
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सूरजपुर में 14 लोगों की जान ले चुके 'कबरा' हाथी की दहशत, रोड पर बैरियर लगाकर आवाजाही रोकी
बगडा़-बंशीपुर मार्ग के बीच लगाया गया बेरियर फोटो नईदुनिया

HighLights

  1. 14 लोगों की जान ले चुका 'कबरा' हाथी 13 हाथियों संग सक्रिय।
  2. वन विभाग ने बगड़ा-बंशीपुर मार्ग पर बैरियर लगाकर रोकी आवाजाही।
  3. महान नदी में पानी पीने के बाद सोनगरा जंगल में घुसा दल।

नईदुनिया प्रतिनिधि, प्रतापपुर: वन मंडल सूरजपुर के वन परिक्षेत्र प्रतापपुर में कबरा हाथी के भय का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गुरुवार की सुबह वन विभाग को ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए बगड़ा-बंशीपुर मार्ग पर बेरियर लगाकर आवागमन पूरी तरह बंद करना पड़ा। 14 लोगों की जान ले चुका कबरा हाथी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा है। उसकी तेज आवाजाही और अनिश्चित विचरण के कारण आसपास के गांवों में भय का माहौल है।

गुरुवार को कबरा और बड़ादेव हाथी करीब 13 हाथियों के दल के साथ धरमपुर के बगड़ा और बंशीपुर के जंगलों के बीच विचरण करते रहे। हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने सुबह ही बगड़ा-बंशीपुर मार्ग पर बेरियर लगाकर आवाजाही रोक दी थी। दिनभर मार्ग बंद रखा गया।


वन विभाग की टीम और हाथी मित्र दल मौके पर डटे रहे तथा लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए रखी। मुनादी करके ग्रामीणों को बार-बार चेतावनी दी गई कि वे इस मार्ग की ओर बिल्कुल न आएं। वन विभाग के अनुसार गुरुवार शाम करीब चार बजे सर्किल धरमपुर के ग्राम बगड़ा पी-9 जंगल से निकलकर कबरा हाथी महान नदी में पानी पीने के बाद सोनगरा-बंशीपुर जंगल के कक्ष क्रमांक आरएफ 1688 में प्रवेश कर गया। इसके आगे पंडरीडांड़, झींगादोहर, सोनगरा, कोरोंधा सहित आसपास के क्षेत्रों में पहुंचने की संभावना जताई जा रही थी।

वहीं बंशीपुर के जंगल कक्ष क्रमांक 1682 में विचरण कर रहा बड़ादेव हाथी भी सोनगरा के बांसबाड़ी कक्ष क्रमांक 1685 की ओर बढ़ रहा था। इससे पूर्व सुबह के समय कबरा हाथी वन क्षेत्र टुकूड़ांड के ग्राम मसगा भदाईपारा से निकलकर वन क्षेत्र धरमपुर के गणेशपुर, गोटगवां, सिंघरा और भरदा होते हुए बगड़ा के पी-9 जंगल में पहुंचा था।

यहां से वह बंशीपुर-सोनगरा के जंगलों की ओर निकला था। लगातार एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पहुंचने के कारण वन विभाग के सामने भी उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखना चुनौती बना हुआ है। कान सहित शरीर के कई हिस्सों का रंग भिन्न होने के कारण उसे कबरा नाम दिया गया है।

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जंगलों में घटता रहवास, बढ़ रहा मानव-हाथी संघर्ष

लगातार बढ़ रही हाथियों की आवाजाही ने जंगल से लगे गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर जंगलों में हाथियों के प्राकृतिक रहवास को फिर से विकसित करने की जरूरत महसूस की जा रही है। जंगलों की कटाई से चारा और पानी के प्राकृतिक स्रोत प्रभावित होने के कारण हाथियों की आवाजाही ग्रामीण बस्तियों की ओर बढ़ रही है।

हाथी धान और गन्ने की फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बन रहे हैं। ऐसे में केवल हाथियों की निगरानी और ग्रामीणों को चेतावनी देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके प्राकृतिक रहवास, भोजन और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में भी ठोस पहल जरूरी है।

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