
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: सात साल के बेटे को अपने पास रखने की मांग करने वाले पिता को हाई कोर्ट ने अभिरक्षा देने से इन्कार कर दिया है। हालांकि, पिता को बेटे से मिलने का रास्ता दिया है। कोर्ट ने कहा कि पिता सार्वजनिक स्थान पर बच्चे से मिलने का अनुरोध कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले मां को सूचना देनी होगी और समय व स्थान पर उनकी सहमति जरूरी होगी। त्योहार, जन्मतिथि और स्कूल की लंबी छुट्टियों में भी इस व्यवस्था के तहत मुलाकात की जा सकेगी।
जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की पीठ ने 29 अक्टूबर 2026 को बलौदाबाजार निवासी पिता की अपील का निराकरण करते हुए यह व्यवस्था दी। पिता ने पारिवारिक न्यायालय के 27 अगस्त 2024 के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें बेटे की अभिरक्षा मां को देने के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। उनका विवाह 28 अप्रैल 2015 को हुआ था।
दोनों का तलाक सात फरवरी 2022 को हो चुका है। उनका बेटा मां के साथ रह रहा है। पिता पेशे से शिक्षक हैं। उन्होंने पारिवारिक न्यायालय में दावा किया था कि वे बेटे को बेहतर शिक्षा और देखभाल दे सकते हैं। उनका परिवार संयुक्त है और घर में अन्य सदस्य भी बच्चे की देखभाल कर सकते हैं। मां ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि वह बेटे की पढ़ाई और परवरिश ठीक से कर रही हैं। बच्चा दूसरी कक्षा में पढ़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिता ने जन्म के बाद से बच्चे से मिलने या उसकी देखभाल करने में रुचि नहीं दिखाई और भरण-पोषण की राशि भी नियमित रूप से नहीं दी।
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बच्चे की पढ़ाई और मौजूदा माहौल को माना अहम
हाई कोर्ट ने कहा कि बच्चे की अभिरक्षा तय करने में माता-पिता के अधिकारों से अधिक बच्चे का कल्याण महत्वपूर्ण है। पिता के शिक्षक होने और बेहतर शिक्षा देने की क्षमता मात्र से यह साबित नहीं होता कि मां के पास बच्चे की उपेक्षा हो रही है। मां ने स्कूल की फीस की रसीदें पेश की थीं, जिनसे बच्चे की पढ़ाई जारी होने की पुष्टि हुई।
पिता के साथ जाने से बेटे ने किया था इन्कार
कोर्ट ने यह भी पाया कि बचपन से पिता के साथ बच्चे का सार्थक संपर्क नहीं रहा है। पारिवारिक न्यायालय में पेशी के दौरान भी बच्चे ने पिता के साथ जाने की इच्छा नहीं जताई थी। ऐसे में बच्चे के मौजूदा माहौल को बदलने का कोई ठोस आधार नहीं था। सुनवाई के दौरान पिता के वकील ने भी बच्चे की अभिरक्षा की मांग पर जोर देने के बजाय मुलाकात का अधिकार देने की मांग तक अपनी दलील सीमित कर दी थी।
तय दिन नहीं, आपसी सहमति से होगी मुलाकात
युगलपीठ ने कहा कि हर सप्ताह या महीने मुलाकात का निश्चित कार्यक्रम तय करने से माता-पिता के बीच विवाद और बच्चे पर मानसिक दबाव बढ़ सकता है। इसलिए पिता सार्वजनिक स्थान पर बच्चे से मिलने का अनुरोध कर सकेंगे। मां को पहले सूचना देकर समय और स्थान पर उनकी सहमति लेनी होगी। मां से अपेक्षा की गई है कि वे बच्चे के हित को प्राथमिकता देते हुए ऐसे अनुरोध पर सद्भावना से विचार करें।
कोर्ट ने बच्चे की अभिरक्षा मां के पास रखने के पारिवारिक न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। अपील को अभिरक्षा की मांग के संबंध में खारिज करते हुए मुलाकात की व्यवस्था में सीमित संशोधन के साथ निराकृत कर दिया।