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तमोर जजावल अभयारण्य में हाथी के हमले से ग्रामीण की दर्दनाक मौत, जंगल में मिला शव

सूरजपुर जिले के तमोर जजावल अभयारण्य में हाथी के हमले से पुतकी जजावल निवासी करमचंद (40) की मौत हो गई। वह 27 अगस्त से घर से बिना बताए लापता था और 29 अगस...और पढ़ें

By Anang Pal DixitEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 30 Aug 2026 10:25:42 PM (IST)Updated Date: Sun, 30 Aug 2026 10:25:42 PM (IST)
तमोर जजावल अभयारण्य में हाथी के हमले से ग्रामीण की दर्दनाक मौत, जंगल में मिला शव
कई किमी का पैदल सफर तय कर घटनास्थल पहुंची टीम

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ के जंगलों में बढ़ रहा हाथियों का आतंक।
  2. सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर उठे गंभीर सवाल।
  3. बारिश के बीच पैदल चलकर पहुंचे अधिकारी।

नईदुनिया प्रतिनिधि, प्रतापपुर: वन मंडल सूरजपुर में हाथियों के हमलों में लगातार हो रही मौतों के बीच ओड़गी क्षेत्र स्थित तमोर जजावल अभयारण्य में हाथी के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई। मृतक की पहचान करमचंद पिता जयलाल (40), निवासी पुतकी जजावल के रूप में हुई है। वह 27 अगस्त को घर से बिना बताए निकला था, जिसके बाद स्वजन ने उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। 29 अगस्त को गांव के कुछ ग्रामीण जंगल की ओर गए तो बालम पहाड़ के घनघोर जंगल में उसका शव पड़ा मिला।

ग्रामीणों ने इसकी सूचना तमोर क्षेत्र के वनकर्मियों को दी। सूचना मिलने के बाद वनकर्मी चंदौरा थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह धुर्वे सहित अन्य पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुए।

घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता बेहद दुर्गम था। बारिश के बीच पुलिस और वनकर्मियों को काफी दूरी तक पैदल चलना पड़ा। रात करीब नौ बजे शव को जंगल से बाहर लाया जा सका। मामले को लेकर थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह धुर्वे ने बताया कि बालम पहाड़ के ऊपर घनघोर जंगल में शव पड़ा था। मौके पर मृतक का छाता और कपड़े भी मिले।


आसपास हाथी के पैरों के कई निशान पाए गए हैं। वहीं वन विभाग के अनुसार प्रथम दृष्टया मादा हाथी के हमले में मौत होने की आशंका है। मादा हाथी ने उसे सूंड़ में लपेटकर नीचे पटका होगा जिससे उसकी मौत हो गई। मादा हाथी के हमले में मौत होने की आशंका इसलिए जताई जा रही है क्योंकि मादा हाथी शव को क्षत-विक्षत नहीं करती जबकि नर हाथी क्षत-विक्षत कर देता है। बताया जा रहा है कि करमचंद की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह अक्सर बिना बताए घर से निकल जाता था।

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हालांकि वह सामान्यतः शाम तक वापस लौट आता था। अनुमान है कि 27 अगस्त को जंगल की ओर जाते समय वह बालम पहाड़ तक पहुंच गया और लौटते समय रास्ता भटक गया। इसी दौरान उसका सामना हाथी से हुआ और हाथी के हमले में उसकी मौत हो गई। बता दें कि घटनास्थल ओड़गी क्षेत्र में है जो थाना चंदौरा अंतर्गत आता है।

15 किलोमीटर का रास्ता आज तक नहीं बना

पुतकी गांव मुख्य मार्ग पर स्थित तमोर जजावल बैरियर से करीब 15 किलोमीटर दूर है। गांव तक पहुंचने के लिए आज तक पक्के मार्ग का निर्माण नहीं हो सका है। ग्रामीणों को अब भी पुराने, उबड़-खाबड़ जंगली रास्ते से आवागमन करना पड़ता है। गांव में बिजली पहुंच चुकी है, लेकिन सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव है।

घटनास्थल भी गांव से करीब 12 किलोमीटर आगे बालम पहाड़ के घने जंगल में स्थित था। वन विभाग ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद स्वजनों को सौंप दिया है। विभाग की ओर से मृतक के स्वजनों को तात्कालिक सहायता के रूप में 25 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई है।