
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर: ग्राम पंचायत पुतकी के आश्रित ग्राम खुटरीपारा में प्रशासन और पंचायत की उदासीनता से तंग आकर ग्रामीणों ने खुद ही बदहाल सड़क की मरम्मत का जिम्मा उठा लिया है। करीब दो किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। बरसात के बाद स्थिति और भी खराब हो गई है, जिससे ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और मरीजों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क खुटरीपारा को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली एकमात्र सड़क है, जिस पर प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का आना-जाना होता है। सड़क पर एक से दो फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं। बारिश का पानी भरने से गड्ढों का अंदाजा नहीं लगता और आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। कई बार पंचायत को अवगत कराने के बाद भी सुधार नहीं हुआ, तो आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही फावड़ा, तगाड़ी और मुरम लेकर सड़क पाटने का काम शुरू कर दिया।
सहदेव, बिजेंद्र, महेंद्र, विजय, शिव, राजू, परवीन, मोनू, ढाकेश्वर, जागेश्वर, नरेश, रामकुमार और पंकदास सहित अन्य ग्रामीण सुबह से ही सड़क पर जुटे रहे। ग्रामीणों का कहना है कि उनका यह प्रयास स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि तत्काल आवागमन को सुचारु बनाए रखने की कोशिश है। स्थायी मरम्मत और डामरीकरण तो पंचायत और संबंधित विभाग को ही कराना होगा।
हाथियों की मौजूदगी से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले करीब एक सप्ताह से क्षेत्र में जंगली हाथियों का दल विचरण कर रहा है। ऐसे में खराब सड़क चिंता का कारण बन गई है। हाथियों की मौजूदगी के दौरान वन विभाग की निगरानी टीम, कैपर वाहन और आपातकालीन दल को समय पर पारा-मोहल्लों तक पहुंचना जरूरी है, लेकिन बदहाल सड़क इसमें बड़ी बाधा बन रही है। ग्रामीणों को डर है कि किसी अनहोनी की स्थिति में मदद पहुंचने में देरी हो सकती है।
पंचायत सचिव की कार्यशैली पर भी सवाल
सड़क की बदहाली के साथ-साथ ग्रामीणों ने पंचायत सचिव की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई है। पंच रामरतन खैरवार, अनुराग सिंह गुर्जर और अवलेंद्र गुर्जर ने बताया कि पंचायत में कराए गए कई कार्यों का भुगतान महीनों से लंबित है। करीब एक साल पहले सड़क और अन्य कार्यों में तीन दिन तक जेसीबी से काम कराया गया था, लेकिन मशीन मालिक को आज तक भुगतान नहीं मिला है। इससे अब एक्सीवेटर संचालक गांव में काम करने से बच रहे हैं।
जनपद कार्यालय में भुगतान को लेकर शिकायत
ग्रामीणों ने बताया कि तेंदू चौक से कुल्लूघाटिया तक बीडीसी मद से करीब 1.70 लाख रुपये की लागत से मुरमीकरण कार्य कराया गया था और गांव में एक नहानी व दो ढोंढी निर्माण पर करीब 1.10 लाख रुपये खर्च बताया गया, लेकिन इन कार्यों के भुगतान और गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप है कि सचिव द्वारा अपनी पत्नी के नाम से ट्रेडर्स संचालित किया जा रहा है। इस संबंध में जनपद सीईओ कार्यालय में शिकायत भी की गई है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क का स्थायी निर्माण कराया जाए और पंचायत में कराए गए कार्यों, भुगतान अभिलेखों और माप पुस्तिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।