सोलर दीदियों ने बदली बालोद के नारागांव की तस्वीर, छत्तीसगढ़ का पहला सौर ऊर्जाकृत गांव बना
महिला नेतृत्व, सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी से गुरुर ब्लॉक के नारागांव ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है।
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 07:37:41 PM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 07:39:02 PM (IST)
सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम में जिला स्तरीय राज्योत्सव समारोह में सोलर दीदियों को सम्मानित किया गया।HighLights
- सोलर दीदियों को सम्मानित किया गया
- तीन महीने में 100 सिस्टम चालू किए गए
- महिलाओं को ढाई लाख से अधिक की आय
नईदुनिया न्यूज, बालोद। महिला नेतृत्व, सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी से गुरुर ब्लॉक के नारागांव ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। सोलर दीदियों की पहल से गांव के घर सौर ऊर्जा से जुड़ रहे हैं।
इस मॉडल की खासियत यह है कि इसमें हितग्राहियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ा और न ही शासन को अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ा।
सोलर दीदियों को सम्मानित किया गया
महिलाओं ने सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाने की जिम्मेदारी संभालकर गांव को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सोमवार को जिला मुख्यालय स्थित सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम में आयोजित जिला स्तरीय राज्योत्सव समारोह में इस उपलब्धि के लिए सोलर दीदियों को सम्मानित किया गया।
तीन महीने में 100 सिस्टम चालू किए गए
आंचल महिला संकुल संगठन से जुड़ी महिलाओं ने घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को सौर ऊर्जा के लाभ बताए और छतों पर रूफटॉप सिस्टम लगवाने के लिए प्रेरित किया। बेहतर समन्वय और सामूहिक प्रबंधन से महज तीन महीने में 100 सिस्टम स्थापित कर चालू किए गए। वहीं करीब 150 घरों के लिए पंजीयन कराया गया है।
महिलाओं को ढाई लाख से अधिक की आय
जिला पंचायत सीईओ सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि इस पहल से महिला समूह को अब तक 2.50 लाख रुपये से अधिक की आय हो चुकी है। सोलर रूफटॉप सिस्टम के विस्तार को महिलाओं ने रोजगार के रूप में अपनाया है। इससे प्रत्येक दीदी को प्रतिमाह करीब दो से तीन हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। इस तरह स्वच्छ ऊर्जा के प्रसार के साथ महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है।
बिना अतिरिक्त अनुदान के तैयार हुआ मॉडल
कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने बताया कि आंचल समूह की दीदियां वेंडर के रूप में पंजीकृत हुईं और व्यावहारिक प्रशिक्षण लेकर स्वयं सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित करने का काम संभाला। इस पहल में किसी अतिरिक्त शासकीय अनुदान, सीएसआर या अन्य मद की राशि का उपयोग नहीं किया गया।
पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था
शुरुआत में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था, ताकि महिलाओं की रुचि और कार्यक्षमता को परखा जा सके। दीदियों ने महज तीन महीने में 100 सोलर सिस्टम स्थापित कर चालू कर दिए, जो सराहनीय उपलब्धि है।
अब इसके विस्तार के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इससे जिले में लखपति दीदियों की संख्या बढ़ने और महिलाओं की आय के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
दूसरे गांवों के लिए बनेगा प्रेरणा
नारागांव की यह पहल महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण स्वरोजगार का उदाहरण बन रही है। सौर ऊर्जा के उपयोग से पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने के साथ अन्य गांवों को भी इस माडल से प्रेरणा मिल सकती है।
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