• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बालोद

1 जनवरी से बदलेगा सरकारी कामकाज का तरीका, अब 'ई-ऑफिस' सिस्टम से डिजिटल होंगी फाइलें

जिले के सरकारी विभागों में 1 जनवरी, 2026 से कामकाज की पूरी प्रक्रिया बदलने वाली है। कलेक्टर कार्यालय सहित सभी प्रमुख विभागों में संपूर्ण कार्यालयीन नस...और पढ़ें

By RB news agencyEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 28 Dec 2025 08:57:43 PM (IST)Updated Date: Sun, 28 Dec 2025 08:57:43 PM (IST)
1 जनवरी से बदलेगा सरकारी कामकाज का तरीका, अब 'ई-ऑफिस' सिस्टम से डिजिटल होंगी फाइलें
अब 'ई-ऑफिस' सिस्टम से डिजिटल होंगी फाइलें

नईदुनिया प्रतिनिधि, बालोद। जिले के सरकारी विभागों में 1 जनवरी, 2026 से कामकाज की पूरी प्रक्रिया बदलने वाली है। कलेक्टर कार्यालय सहित सभी प्रमुख विभागों में संपूर्ण कार्यालयीन नस्तियों (फाइलों) और डाक का संपादन अब अनिवार्य रूप से 'ई-ऑफिस' के माध्यम से ही किया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार, विभाग प्रमुख के अनुमोदन के बिना अब कोई भी फिजिकल फाइल (कागजी फाइल) संचालित नहीं की जाएगी। इस बदलाव से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता आने के साथ ही अभूतपूर्व तेजी आने की उम्मीद है।

साल भर की तैयारी अब लाएगी रंग

राज्य के मुख्य सचिव ने इस संबंध में सभी विभागों, विभागाध्यक्षों, राजस्व मंडल, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं। प्रदेश में पिछले करीब एक साल से ई-ऑफिस प्रक्रिया शुरू करने की पुरजोर कोशिशें की जा रही थीं, जो अब 1 जनवरी से धरातल पर नजर आएंगी। नए नियम के तहत, जिन प्रकरणों पर शासन स्तर से सहमति या अनुमोदन आवश्यक है, उन्हें अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा ई-ऑफिस फाइल के माध्यम से ही शासन को भेजा जाएगा। वहीं, सूचनात्मक पत्राचार के लिए ई-ऑफिस की 'रिसीप्ट' (पावती) व्यवस्था का उपयोग किया जाएगा।


ई-ऑफिस सिस्टम के प्रभावी लाभ

डिजिटल सिस्टम लागू होने से सरकारी कार्यप्रणाली में कई बड़े सुधार देखने को मिलेंगे...

  • पारदर्शिता और जवाबदेही: डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए अब यह पता लगाना आसान होगा कि कौन सी फाइल किस अधिकारी के पास कितने समय से लंबित है। इससे फाइलों को 'ठंडे बस्ते' में डालने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
  • समय की बचत: फाइलों को एक टेबल से दूसरे टेबल तक मैन्युअल रूप से ले जाने में लगने वाला समय अब शून्य हो जाएगा। डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature) के माध्यम से त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे।
  • अभिलेखों की सुरक्षा: महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेजों का डिजिटल भंडारण होगा, जिससे उनके फटने, खोने या आग लगने जैसी घटनाओं से नष्ट होने का खतरा खत्म हो जाएगा।
  • पर्यावरण संरक्षण: कागज, प्रिंटिंग और फाइलों के रखरखाव पर होने वाले खर्च में भारी कमी आएगी, जिससे सरकारी धन की बचत के साथ पर्यावरण को भी लाभ होगा।

सुशासन की दिशा में बड़ा कदम

मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शासकीय कार्यों को अधिक प्रभावी, सरलीकृत, उत्तरदायी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ही मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक ई-ऑफिस प्रारंभ किया गया है। इस व्यवस्था की एक बड़ी खासियत यह भी है कि अधिकारी मुख्यालय से बाहर होने पर या दौरे के दौरान भी ई-ऑफिस के माध्यम से जरूरी कार्य संपादित कर सकेंगे। साथ ही, सार्वजनिक अवकाश की अवधि में भी शासकीय सेवक आवश्यकतानुसार घर बैठे ऑनलाइन कार्य कर सकेंगे।

ठंडे बस्ते में नहीं दबेंगे आवेदन

जानकारों का मानना है कि अब तक जो आवेदन या मांग पत्र फाइलों के ढेर में दब जाते थे, अब उनकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी। ई-ऑफिस सिस्टम के माध्यम से अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय होगी, जिससे आम जनता के काम समय सीमा के भीतर पूरे हो सकेंगे।

यह भी पढ़ें- कस्टम और CBI के नाम पर 'खेल', ऐसे बुना गया 50 लाख की ठगी का जाल, दंतेवाड़ा पुलिस ने किया पर्दाफाश