
नईदुनिया प्रतिनिधि, बलरामपुर : जिला मुख्यालय से सटे कोरवा आवासीय विद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाली घटना सामने आई है। गुरुवार की रात छात्रावास में सोने के बजाय आठ बच्चों ने खिड़की का ग्रिल उखाड़ दिया और स्कूल की चाहरदीवारी फांदकर फरार हो गए।
रात में सड़क पर घूमते हुए इन बच्चों ने एक किराना दुकान में चोरी का प्रयास किया, जिसके बाद पूरा मामला सामने आया। प्रकरण में लापरवाही के आरोप पर प्रभारी प्राचार्य को हटा दिया गया है। विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार गुरुवार रात सभी बच्चे छात्रावास के कमरे में थे। इसी दौरान उन्होंने पहले से ढीले पड़े खिड़की के ग्रिल को हटाया और एक-एक कर बाहर निकल गए। आरोप है कि विद्यालय में उस समय कोई अधीक्षक या चौकीदार मौजूद नहीं था, जिसका फायदा उठाकर बच्चे आसानी से बाहर निकल गए।
भागने के बाद सभी बच्चे जिला मुख्यालय की तरफ पहुंच गए और एक बंद किराना दुकान का शटर उठाकर अंदर घुसने का प्रयास करने लगे। आवाज सुनकर आसपास के लोगों की नींद खुली और उन्होंने बच्चों को घेर लिया। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने चार बच्चों को पकड़ लिया, जबकि चार अन्य अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। पकड़े गए बच्चों से पूछताछ में पता चला कि वे कोरवा आवासीय विद्यालय के छात्र हैं।
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बाद में भागे हुए चार बच्चों में से दो बच्चे अपने-अपने घरों में मिले, जिन्हें स्वजन ने विद्यालय प्रबंधन को सौंपा। इस पूरे मामले में बलरामपुर सिटी कोतवाली थाना प्रभारी भापेंद्र साहू ने बताया कि पुलिस को इस घटना की कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। किराना दुकान के संचालक की ओर से भी चोरी के प्रयास की शिकायत थाने में नहीं की गई है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने दिखाई सख्ती, प्रभारी प्राचार्य हटाई गईं
घटना की जानकारी मिलते ही आदिवासी विकास विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। सहायक आयुक्त ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए त्वरित कार्रवाई की। विद्यालय की प्रभारी प्राचार्य सुफला टोप्पो को लापरवाही बरतने के आरोप में हटा दिया गया है।विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
इस घटना ने एक बार फिर आवासीय विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, रात्रिकालीन निगरानी और अधीक्षक की मौजूदगी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का कहना है कि जिस विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा के लिए ग्रिल लगाई गई है, उसी ग्रिल को बच्चे उखाड़ कर भाग जाएं, तो यह प्रबंधन की घोर लापरवाही है।