
नईदुनिया प्रतिनिधि,अंबिकापुर: शासकीय जंगल को निजी जमीन में बदलने के लिए नया पैंतरा आजमाया गया। बलरामपुर जिले के चलगली थाना क्षेत्र में एक परिवार ने मात्र 15 हजार रुपये खर्च कर 10 एकड़ जंगल की जमीन का फर्जी वन अधिकार पट्टा तैयार करा लिया। वन विभाग की सतर्कता से पूरा खेल बेनकाब हो गया। प्रकरण में चलगली पुलिस ने तीन लोगों के विरुद्ध धारा 318(4), 336(3), 338, 3(5) भारतीय न्याय संहिता के तहत केस दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार ग्राम केरता निवासी शिवलाल ने दलाल रामशकल उर्फ सकलू निवासी कोटरकी को 15 हजार रुपये दिए। बदले में रामशकल ने तीन अलग-अलग फर्जी वन अधिकार पत्र व पुस्तिकाएं थमा दीं। पहली शिवलाल के नाम दो हेक्टेयर, पत्नी रमपतिया के नाम 1.200 हेक्टेयर और बेटे रामकुमार के नाम 0.800 हेक्टेयर। कुल मिलाकर चार हेक्टेयर यानि करीब 10 एकड़ जंगल की जमीन का फर्जी पट्टा उन्हें मिल गया।
इस गड़बड़ी का राजफाश मानिकपुर सर्किल के वनपाल अनिल कुजूर की सतर्कता से हुआ। ग्रामीणों ने उसे सूचना दी कि बीट मुरका के जंगल में शिवलाल झोपड़ी बनाकर कब्जा कर रहा है। वन अमला मौके पर पहुंचा तो शिवलाल ने तुरंत जेब से तीन वन अधिकार पट्टे निकालकर दिखा दिए।
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कागज पर खसरा और कम्पार्टमेंट नंबर तक अस्पष्ट थे। शक होने पर वन परिक्षेत्राधिकारी बलरामपुर को फोन किया गया। कड़ाई से पूछने पर शिवलाल टूट गया और बताया कि पट्टे उसने 2025 में पैसे देकर बनवाए हैं।
वन विभाग ने तीनों पट्टे जब्त किए और सत्यापन के लिए सहायक आयुक्त आदिवासी विकास के माध्यम से कलेक्टर भू-अभिलेख अंबिकापुर भेजा। वहां से जवाब आया कि दायरा पंजी में इन तीनों नामों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। कार्यालय ने ऐसे कोई पट्टे जारी ही नहीं किए।
इसके बाद वनपाल अनिल कुजूर की लिखित शिकायत पर चलगली थाने में शिवलाल, उसके पुत्र रामकुमार और फर्जी पट्टा बनाने वाले रामशकल के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का केस दर्ज कर लिया गया है।
वन विभाग ने फर्जी पट्टे, जब्ती पंचनामा, शिवलाल का कथन और भू-अभिलेख विभाग का पत्र जब्त कर विवेचना शुरू कर दी है।