
नईदुनिया प्रतिनिधि, बीजापुर: बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में गुरुवार को माओवादी गतिविधियों के खिलाफ बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई। साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े कुल 52 माओवादियों ने हिंसा और जनविरोधी विचारधारा को त्यागते हुए आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पित माओवादियों पर कुल 1.41 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इनमें 21 महिलाएं शामिल हैं, जो लंबे समय से माओवादी संगठनों में सक्रिय थीं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी), आंध्र-ओडिशा बॉर्डर (एओबी) डिवीजन और माड़ डिवीजन से जुड़े हुए थे। इनमें माड़ डिवीजन का डीवीसीएम लक्खू कारम उर्फ अनिल भी शामिल है, जिसे संगठन का सक्रिय सदस्य माना जाता था।
सभी आत्मसमर्पित माओवादियों ने भारतीय संविधान में विश्वास व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत शांतिपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लिया है। राज्य शासन की ‘पूना मारगेमः पुनर्वास से पुनर्जीवन’ नीति के अंतर्गत प्रत्येक आत्मसमर्पित माओवादी को 50 हजार रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने शेष माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2024 से अब तक जिले में 876 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि 1,126 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है और 223 मुठभेड़ों में मारे गए हैं।
शीर्ष माओवादी भूपति और रूपेश के बाद बारसे देवा के आत्मसमर्पण से संगठन को बड़ा झटका लगा है। अब शीर्ष नेतृत्व में केवल पापाराव ही बचा है। वर्ष 2025 के दौरान राज्य में करीब 550 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए, जबकि लगभग 2,500 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।
बीते 48 घंटों में 81 माओवादियों ने हिंसा और हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया, जिनमें साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े 52 माओवादी शामिल हैं। इन पर कुल 1.41 करोड़ रुपये का इनाम था। यह हिंसक विचारधारा पर लोकतंत्र और विकास की निर्णायक जीत है। बस्तर में भय की जगह अब शासन, सुरक्षा और विकास योजनाओं से भरोसा और भविष्य आकार ले रहा है।
-विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री