
नईदुनिया प्रतिनिधि, बीजापुर। बीजापुर के गंगालूर स्थित आवासीय परिसर से जुड़ी तीन छात्राओं के गर्भवती होने का मामला सामने आने के दो दिन बाद भी पुलिस में अब तक कोई अपराध दर्ज नहीं किया गया है। इनमें से दो छात्राओं के नाबालिग होने की बात सामने आने के बावजूद मामला दर्ज न होने से कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे मामलों में पोक्सो एक्ट के तहत स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करना अनिवार्य माना जाता है।
मामले की जांच के लिए प्रशासन ने जिला स्तरीय समिति गठित कर दी है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छात्राएं किन परिस्थितियों में गर्भवती हुईं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
पांच महीने से स्कूल नहीं आ रही थीं छात्राएं
जानकारी के अनुसार तीनों छात्राएं करीब पांच महीने से स्कूल नहीं आ रही थीं। इसके बावजूद विद्यालय प्रबंधन और छात्रावास प्रशासन ने समय रहते उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी। जबकि आवासीय विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति, सुरक्षा और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की व्यवस्था होती है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि छात्राएं कुछ समय पहले तक परिसर में संचालित आश्रम में रह रही थीं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि छात्रावास और आश्रम प्रशासन को इतने लंबे समय तक उनकी स्थिति की जानकारी क्यों नहीं हुई।
महिला एवं बाल विकास विभाग की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम गंगालूर पहुंची है और जांच शुरू कर दी है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी के अनुसार बाल संरक्षण अधिकारी के साथ टीम को मौके पर भेजा गया है और छात्राओं तथा संबंधित पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी एलएल धनेलिया ने बताया कि तीनों छात्राएं लंबे समय से स्कूल नहीं आ रही थीं और इस मामले में प्राचार्य व छात्रावास अधीक्षिका को नोटिस जारी किया जा रहा है।
अधिकारियों ने क्या कहा
वहीं कलेक्टर संबित मिश्रा ने कहा कि जिला स्तरीय जांच समिति पूरे मामले की जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और नाबालिग छात्राओं के मामले में पुलिस को सूचना देकर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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