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दो ट्रांसपोर्ट कंपनियों के बीच 20.60 करोड़ का विवाद; हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जज को सौंपा मामला

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 20.60 करोड़ रुपये के कारोबारी भुगतान विवाद में रिटायर्ड जस्टिस रजनी दुबे को सोल आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। यह मामला रायपुर और...और पढ़ें

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 10:36:56 AM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 10:36:56 AM (IST)
दो ट्रांसपोर्ट कंपनियों के बीच  20.60 करोड़ का विवाद; हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जज को सौंपा मामला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

HighLights

  1. रायपुर-विशाखापट्टनम ट्रांसपोर्ट फर्मों के बीच भुगतान का मामला।
  2. करोड़ों का बकाया और बाउंस चेक, सुनवाई में नहीं पहुंचा प्रतिवादी।
  3. हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब रिटायर्ड जज सुलझाएंगी विवाद।

नईदुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 20.60 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबारी भुगतान विवाद में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रजनी दुबे को एकमात्र मध्यस्थ (सोल आर्बिट्रेटर) नियुक्त किया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11(6) के तहत दायर याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुए एमओयू में विवादों के समाधान के लिए स्पष्ट आर्बिट्रेशन क्लॉज मौजूद है, इसलिए मामले का निपटारा मध्यस्थता के जरिए किया जाएगा।मामला रायपुर की मेसर्स जय जगदीश ट्रांसपोर्ट और आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित मेसर्स श्री रत्नागिरी ट्रांसपोर्ट के बीच लंबे समय से चले आ रहे कारोबारी लेनदेन से जुड़ा है।

याचिकाकर्ता फर्म ने बताया कि दोनों कंपनियों के बीच वाहनों के किराये, टायरों की खरीद और मरम्मत सहित विभिन्न व्यावसायिक सेवाओं का वर्षों से कारोबार चलता रहा। वर्ष 2021 में हुए एमओयू के अनुसार प्रतिवादी ने 6.39 करोड़ रुपये की देनदारी स्वीकार की थी और दो वर्ष के भीतर भुगतान करने पर सहमति जताई थी।


याचिका के अनुसार तय समय सीमा बीतने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। प्रतिवादी द्वारा जारी सभी चेक भी बाउंस हो गए। बाद के कारोबारी लेनदेन के कारण लेजर खाते के अनुसार कुल बकाया राशि बढ़कर 20 करोड़ 60 लाख 54 हजार 527 रुपये हो गई। इसके बाद 6 अक्टूबर 2025 को आर्बिट्रेशन नोटिस भेजा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिला।

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नोटिस प्रकाशित होने के बाद भी नहीं पहुंचा प्रतिवादी

हाई कोर्ट ने पहले प्रतिवादी को नोटिस जारी किया। नोटिस की तामील नहीं होने पर विशाखापट्टनम के दो प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशन कराया गया। इसके बावजूद प्रतिवादी न तो स्वयं उपस्थित हुआ और न ही उसकी ओर से कोई अधिवक्ता कोर्ट में पेश हुआ।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एमओयू की धारा-10 में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है कि दोनों पक्षों के बीच उत्पन्न किसी भी विवाद का निपटारा रायपुर में मध्यस्थता के माध्यम से किया जाएगा। इस प्रावधान को वैध मानते हुए हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रजनी दुबे को सोल आर्बिट्रेटर नियुक्त कर दिया।

अदालत ने रजिस्ट्री को आदेश की प्रति न्यायमूर्ति रजनी दुबे को भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि मध्यस्थ का पारिश्रमिक दोनों पक्ष आपसी सहमति से तय करेंगे। इसके साथ ही आर्बिट्रेशन याचिका का निपटारा कर दिया गया।