नईदुनिया प्रतिनिधि,बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दिव्यांग अधिकारों के संरक्षण को लेकर एक बड़ा और संवेदनशील फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती विज्ञापन या किसी वैधानिक कानून में मनाही न हो, तो केवल किसी विभागीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को व्यायाम शिक्षक के पद के लिए अपात्र घोषित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने एक दृष्टिबाधित महिला शिक्षक की बर्खास्तगी को अवैध करार देते हुए उन्हें पूरे पिछले वेतन के साथ नौकरी में बहाल करने का आदेश दिया है, वहीं दूसरे शिक्षक को जारी कारण बताओ नोटिस को भी निरस्त कर दिया है। लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर द्वारा 9 मार्च 2019 को व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षकों के पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था।
इस विज्ञापन में दिव्यांगजनों के लिए 7% आरक्षण का प्रावधान था। बिलासपुर संभाग के अंतर्गत तखतपुर रामनगर टिकरापारा निवासी शिव शंकर साहू और नील कुमारी (दोनों 40% दृष्टिबाधित) ने व्यायाम शिक्षक (टीचर- फिजिकल एजुकेशन) के पद पर आवेदन किया। पूरी चयन प्रक्रिया पार करने और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद दोनों को 24 अगस्त 2021 को व्यायाम शिक्षक के पद पर नियुक्ति दे दी गई। दोनों अपने-अपने स्कूलों में निष्ठापूर्वक कार्य कर रहे थे।
विभागीय नोटिस और बर्खास्तगी का झटका
नियुक्ति के लगभग डेढ़ साल बाद, 19 जनवरी 2023 को संयुक्त संचालक (शिक्षा), बिलासपुर संभाग ने दोनों शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। नोटिस में कहा गया कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा गठित एक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, खेल शिक्षक के पद के लिए केवल ओए (एक हाथ से दिव्यांग) और एचएच(सुनने में असमर्थ) श्रेणी के दिव्यांग ही उपयुक्त हैं, दृष्टिबाधित नहीं।शिव शंकर साहू को सेवा समाप्ति का कारण बताओ नोटिस जारी हुआ, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी। नील कुमारी ने नोटिस का विस्तृत जवाब दिया, लेकिन 6 फरवरी 2023 को विभाग ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया। उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट में पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ताओं के वकील (अंकित वर्मा एवं पराग कोटेचा): उन्होंने दलील दी कि वर्ष 2019 के विज्ञापन में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि किस प्रकार की दिव्यांगता वाले अभ्यर्थी इस पद के लिए अपात्र होंगे। संसद द्वारा पारित 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' का उद्देश्य दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। किसी प्रशासनिक समिति की गैर-वैधानिक रिपोर्ट के आधार पर किसी चयनित नागरिक का रोजगार नहीं छीना जा सकता।
राज्य शासन के वकील (अनीश तिवारी एवं मयूर खंडेलवाल): उन्होंने दलील दी कि सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत गठित अधिकारियों की समिति ने पाया था कि खेलकूद की गतिविधियों को देखते हुए व्यायाम शिक्षक के पद पर केवल ओए और एचएच श्रेणी के अभ्यर्थी ही उपयुक्त हैं। इसलिए विभाग की कार्रवाई नियमानुसार है।
हाईकोर्ट की कढ़ी टिप्पणी और सुप्रीम कोर्ट का हवाला
जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार की दलीलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विभाग जिस समिति की रिपोर्ट का हवाला दे रहा है, वह एक प्रशासनिक अनुशंसा मात्र है। उसे 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के तहत कोई वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है। विज्ञापन निकालते समय दृष्टिबाधितों को प्रतिबंधित नहीं किया गया था। पूरी चयन प्रक्रिया में शामिल करने और डेढ़ साल सेवा कराने के बाद खेल के बीच में 'पात्रता के नए नियम' नहीं थोपे जा सकते।
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का संदर्भ: हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया ऐतिहासिक फैसले (In Re: Recruitment of Visually Impaired In Judicial Service, 2025) का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने अमेरिका के प्रसिद्ध जज जॉन मार्शल हरलान के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा था— हमारा संविधान रंग-अंधा है, यह नागरिकों के बीच भेदभाव नहीं करता... सक्षम और दिव्यांग नागरिकों को समान अवसर देना संवैधानिक अदालतों का दायित्व है।
अंतिम आदेश: महिला शिक्षक को 30 दिन में पूर्ण वेतन के साथ बहाली
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आदेश पारित किया।
शिव शंकर साहू: संयुक्त संचालक शिक्षा द्वारा जारी 19 जनवरी 2023 का कारण बताओ नोटिस रद्द कर दिया गया है। चूंकि वे पहले से सेवा में हैं, इसलिए उनका पद सुरक्षित रहेगा।
नील कुमारी: कारण बताओ नोटिस और 6 फरवरी 2023 का बर्खास्तगी आदेश पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है। राज्य शासन को निर्देश दिया गया है कि वे आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता महिला शिक्षक को सेवा में वापस बहाल करें। इसके साथ ही, उन्हें बर्खास्तगी की तारीख से बहाली की तारीख तक का पूरा पिछला और सभी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं।