
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद फरार हुए 32 कैदियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए, इसकी जानकारी छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मांगी है। स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के बाद अब मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें सभी 32 फरार कैदियों के वर्तमान ठिकाने और उनकी स्थिति के साथ पड़ोसी राज्यों की पुलिस से किए गए पत्राचार का ब्योरा भी देना होगा।
26 फरवरी 2026 को पुलिस महानिदेशक के शपथपत्र में बताया गया था कि 40 फरार कैदियों में से दो गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसके बाद 31 जनवरी 2026 तक एक और कैदी की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई और 37 कैदियों के फरार होने की बात कही गई।
27 अप्रैल को पेश शपथपत्र के अनुसार 22 अप्रैल तक एक और कैदी पकड़ा गया था और 36 फरार थे। पुलिस मुख्यालय ने विशेष अभियान चलाने और अधिकारियों को गिरफ्तारी के निर्देश देने की जानकारी दी थी। 20 जुलाई की सुनवाई में अदालत को बताया गया कि दो और कैदियों को पकड़कर जेल भेजा गया है, जिससे फरार कैदियों की संख्या 36 से घटकर 34 रह गई। पुलिस ने विशेष दल बनाने, उनके पुराने पतों और संभावित ठिकानों की जांच करने तथा मुखबिरों से सूचना जुटाने जैसे प्रयासों का उल्लेख किया था।
27 अक्टूबर को पेश ताजा शपथपत्र में बताया गया कि 30 जून 2006 की स्थिति में 34 कैदी फरार थे और 25 अक्टूबर 2025 तक उनमें से दो पकड़े गए थे। शेष 32 अब भी फरार हैं। राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने बताया कि इनमें से अधिकांश कैदी पड़ोसी राज्यों के हैं।
इस पर पीठ ने कहा कि शपथपत्र में यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें पकड़ने के लिए पड़ोसी राज्यों में क्या कार्रवाई की गई। संबंधित राज्यों की पुलिस से संपर्क किए जाने का भी कोई स्पष्ट विवरण नहीं है। शपथपत्र में उन 32 कैदियों का पूरा ब्योरा भी नहीं दिया गया है।
अदालत ने डीजीपी को निर्देश दिया कि तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथपत्र पेश कर फरार कैदियों की स्थिति और पड़ोसी राज्यों की पुलिस से हुए पत्राचार की प्रतियां संलग्न करें। मामले की अगली सुनवाई 21 दिसंबर 2026 को होगी।
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