
नईदुनिया न्यूज, बिलासपुर। राजनांदगांव जिले में हिंदी टंकण कौशल परीक्षा नहीं होने के कारण वर्षों से रुकी 33 कर्मचारियों की वेतनवृद्धि पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला दिया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति की तारीख और सेवा नियमों के अनुसार वर्ष 2013 से 2023 के बीच देय वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाए। अदालत ने कहा कि जिस अवधि में विभाग ने परीक्षा आयोजित ही नहीं की, उस दौरान परीक्षा पास नहीं करने के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं में जयप्रकाश भूनेश्वर, कुशल कुमार मंडावी, थानेश कुमार साहू, जैकलीन डेविड, सिमरत कौर गिल समेत राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बालोद और दुर्ग जिले के 33 कर्मचारी शामिल हैं। सभी की नियुक्तियां अलग-अलग समय पर अनुकंपा के आधार पर हुई थीं।
संबंधित नीति के तहत अनुकंपा नियुक्ति पाने वालों के लिए निर्धारित अवधि में हिंदी टंकण कौशल परीक्षा पास करना जरूरी था। कर्मचारियों का कहना था कि राजनांदगांव में वर्ष 2013 से 2023 तक यह परीक्षा आयोजित ही नहीं की गई। ऐसे में वे परीक्षा देना चाहते हुए भी इसमें शामिल नहीं हो सके और उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि रोक दी गई।
2023 में भी परीक्षा नहीं हुई, 2024 में कराई गई
विभाग ने वर्ष 2023 में जिला स्तर पर परीक्षा कराने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बाद में इसे रद्द कर लोक शिक्षण संचालनालय के माध्यम से केंद्रीकृत परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया। इसके बाद 22 मार्च 2024 की सूचना जारी हुई और 12 व 19 मई 2024 को परीक्षा कराई गई।
दोनों पक्षों ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता बीपी सिंह और रोशन सिंह लांबा ने कहा कि परीक्षा आयोजित नहीं करना पूरी तरह विभाग की चूक थी। इसकी सजा कर्मचारियों को देकर वेतनवृद्धि रोकना उचित नहीं है। उन्होंने इसी तरह के मामले में उच्च न्यायालय के डब्ल्यूपीएस क्रमांक 2128/2013 के फैसले का भी हवाला दिया। यह भी बताया कि कुछ कर्मचारियों को पीजीडीसीए पूरा करने के बाद वेतनवृद्धि का लाभ दिया गया, जबकि समान स्थिति वाले अन्य कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया। राज्य की ओर से कहा गया कि हिंदी टंकण परीक्षा पास करना नीति की अनिवार्य शर्त है। बाद में परीक्षा आयोजित भी हो चुकी है, इसलिए कर्मचारियों को निर्धारित शर्त पूरी करनी होगी।
बाक्स
परीक्षा पास करने की शर्त, लेकिन परीक्षा नहीं हुई तो कर्मी जिम्मेदार नहीं
अदालत ने माना कि हिंदी टंकण परीक्षा पास करने की शर्त नीति में है और आगे की वेतनवृद्धि तथा नियमितीकरण के लिए कर्मचारियों को इसे पूरा करना होगा। लेकिन वर्ष 2013 से 2023 के बीच परीक्षा आयोजित नहीं होने के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि वे परीक्षा से जानबूझकर दूर नहीं रहे, बल्कि परीक्षा ही उपलब्ध नहीं थी।
बाक्स
पात्रता के अनुसार वेतन वार्षिक वेतनवृद्धि और लाभ देने का आदेश
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 33 कर्मचारियों को वर्ष 2013 से 2023 के बीच उनकी पात्रता के अनुसार देय वार्षिक वेतनवृद्धि दी जाए। इसके आधार पर वेतन का दोबारा निर्धारण कर उससे जुड़े आर्थिक लाभ भी जारी किए जाएं। पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी। हालांकि, आगे की वेतनवृद्धि और नियमितीकरण के लिए हिंदी टंकण कौशल परीक्षा पास करना जरूरी रहेगा।