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टेलीफोन पर गाली-गलौज और धमकी के आरोप में एफआइआर रद कराने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंचे 76 वर्षीय बुजुर्ग

पंजाब के लुधियाना स्थित कृषि भूमि से जुड़े विवाद के चलते छत्तीसगढ़ के कोंडागांव थाने में दर्ज एफआइआर को चुनौती देते हुए 76 वर्षीय बुजुर्ग दिलबाग सिंह ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 21 Aug 2026 03:26:55 PM (IST)Updated Date: Fri, 21 Aug 2026 03:26:55 PM (IST)
टेलीफोन पर गाली-गलौज और धमकी के आरोप में एफआइआर रद कराने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंचे 76 वर्षीय बुजुर्ग
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कोंडागांव एफआइआर को चुनौती।
  2. भूमि विवाद से जुड़े मामले में राज्य को नोटिस।
  3. मूल विवाद पंजाब के लुधियाना स्थित कृषि भूमि से जुड़ा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पंजाब के लुधियाना में कृषि भूमि को लेकर चल रहे विवाद के बीच कोंडागांव थाने में दर्ज एफआइआर को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कथित गाली-गलौज और धमकी केवल एक टेलीफोन बातचीत के आधार पर बताई गई है, लेकिन एफआइआर में न तो कथित अपशब्दों का उल्लेख है और न ही धमकी से शिकायतकर्ता को वास्तविक भय या खतरा पैदा होने की बात स्पष्ट है।

हाई कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को नोटिस स्वीकार करने के लिए कहा है और दूसरे प्रतिवादी को भी नोटिस जारी किया है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने 20 अगस्त 2026 में सुनवाई की। याचिका दिलबाग सिंह व अन्य की ओर से दायर की गई है।

जमीन विवाद पंजाब में, एफआइआर छत्तीसगढ़ में

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता साजल कुमार गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि एफआइआर अपराध क्रमांक 0380/2025 कोंडागांव थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 और 351(3) के तहत दर्ज की गई है। आरोप 5 नवंबर 2025 की कथित टेलीफोन बातचीत से संबंधित हैं।


याचिका में कहा गया कि विवाद की मूल वजह पंजाब के लुधियाना जिले के गांव घराला की कृषि भूमि से जुड़ा विवाद है। इस संबंध में सिविल कोर्ट में पहले से कार्यवाही चल रही है। पक्षकारों के बीच 2 नवंबर 2025 को थाना पायल, जिला लुधियाना में समझौता भी हुआ था। इसके बावजूद बाद में कोंडागांव में एफआइआर दर्ज कराई गई।

यह भी पढ़ें- उत्तर प्रदेश से युवक की गिरफ्तारी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को दिया दो सप्ताह का समय

क्षेत्राधिकार पर भी उठाया सवाल

याचिकाकर्ताओं ने एफआइआर दर्ज करने के स्थान को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि भूमि विवाद और उससे जुड़ी पूर्व कार्यवाही पंजाब में है, जबकि कथित घटना केवल टेलीफोन पर बातचीत से जुड़ी है। ऐसे में कोंडागांव थाने में एफआइआर दर्ज किए जाने के क्षेत्राधिकार को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ताओं ने एफआइआर दर्ज कराने में हुई देरी को भी आधार बनाया है। उनका आरोप है कि आपसी विवाद और पारिवारिक रंजिश के चलते आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है।

76 वर्षीय याचिकाकर्ता की स्वतंत्रता और प्रतिष्ठा का हवाला

याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि एफआइआर में लगाए गए आरोप प्रथमदृष्टया कथित अपराध के आवश्यक तत्वों को पूरा नहीं करते। इसलिए आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। विशेष रूप से याचिकाकर्ता नंबर-1 की उम्र 76 वर्ष होने का उल्लेख करते हुए व्यक्तिगत स्वतंत्रता, गरिमा और प्रतिष्ठा के अधिकार का भी हवाला दिया गया।

चार सप्ताह में जवाब, सेवा रिपोर्ट के बाद होगी अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। राज्य की ओर से डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट सौम्य राय ने नोटिस स्वीकार किया। प्रतिवादी नंबर-2 को साधारण डाक और स्पीड पोस्ट से नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। पीएफ सात दिन में जमा करने को कहा गया है। कोर्ट ने सेवा रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

महत्वपूर्ण: इस चरण पर हाई कोर्ट ने एफआइआर रद्द नहीं की है। कोर्ट ने केवल याचिका पर नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई सेवा रिपोर्ट मिलने के बाद होगी।