बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदोन्नति और मनमानी पदस्थापना का बड़ा खेल उजागर
बिलासपुर डीईओ कार्यालय में पदोन्नति और पदस्थापना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जेडी जांच रिपोर्ट के आधार पर डीपीआई ने सहायक ग्रेड-3 लिपिक सुनी...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 09:32:39 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 09:32:39 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- पदोन्नति फर्जीवाड़े में फंसे डीईओ के लिपिक।
- जेडी जांच के बाद डीपीआइ ने थमाया नोटिस, मची खलबली।
- सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदोन्नति और मनमानी पदस्थापना का बड़ा खेल उजागर हुआ है। संभागीय संयुक्त संचालक की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद सहायक ग्रेड-तीन लिपिक सुनील कुमार यादव बुरी तरह घिर गए हैं। जांच में पदोन्नति और पदस्थापना से जुड़े सात बड़े मामलों में गंभीर मनमानी सामने आई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारी को संबंधित लिपिक के खिलाफ 15 दिनों के भीतर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और पालन प्रतिवेदन भेजने के सख्त निर्देश दिए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार पदोन्नति और चहेतों को मनचाही पदस्थापना दिलाने के नाम पर लंबे समय से खेल चल रहा था। शिकायतों के बाद संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा कराई गई विस्तृत जांच में नियमों की धज्जियां उड़ाने की पुष्टि हुई।
जांच में सामने आया कि पदोन्नति प्रक्रिया में अंतरिम वरिष्ठता सूची का सहारा लिया गया, जिसका कोई विधिक आधार नहीं था। इसके अलावा पद रिक्त न होने के बावजूद संशोधन आदेश जारी कर कर्मचारियों को उपकृत किया गया और वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर अन्य संस्थाओं से वेतन आहरण की व्यवस्था बनाई गई। डीपीआई ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन मानते हुए तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
यह भी पढ़ें- बीमार मासूम से धुलवाई उल्टी और साफ करवाई कुर्सी, बिलासपुर के सरकारी स्कूल में अमानवीय कृत्य
जांच में सामने आई गड़बड़ी के सात प्रमुख बिंदु
- एक अगस्त 2022 की अंतरिम वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नति की गई, जिससे पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता खत्म हो गई।
- 28 रिक्त पदों में से 27 पर पदोन्नति हुई, फिर कार्यभार ग्रहण न करने वाले पदों के विरुद्ध नियम विरुद्ध 15 लिपिकों को प्रमोट किया गया।
- जहां पद रिक्त थे वहां पदस्थापना न देकर, कर्मचारियों की इच्छा के अनुसार उनकी पसंदीदा संस्थाओं में पदस्थ किया गया।
- जिन संस्थाओं में पद रिक्त नहीं थे, वहां से फिर अन्य गैर-रिक्त संस्थाओं में संशोधन कर मनमानी पदस्थापना की गई।
- छह कर्मचारियों को बिना रिक्त पद वाली संस्थाओं में पदस्थ कर, अन्य 5 संस्थाओं से वेतन आहरण का गलत आदेश जारी हुआ।
- दिव्यांगता के नाम पर सहायक ग्रेड-3 हितेश वैष्णव को गलत पदोन्नति दी गई, जबकि पदोन्नति में आरक्षण का ऐसा कोई नियम नहीं है ।
- 108 रिक्त पदों की मूल सूची को दरकिनार कर, कर्मचारियों का वेतन आहरण अन्य संस्थाओं पर डालकर वित्तीय अव्यवस्था फैलाई गई।
शिक्षा महकमे में हड़कंप, बड़े अधिकारियों पर भी उठ रहे सवाल
डीपीआई के कड़े पत्र के बाद जिला शिक्षा कार्यालय में हड़कंप मच गया है। विभागीय गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि सहायक ग्रेड-तीन स्तर का एक लिपिक अपने दम पर इतने बड़े पैमाने पर पदोन्नति, संशोधन और अन्य संस्थाओं से वेतन आहरण के आदेश कैसे जारी करा सकता है, चर्चा है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो उस समय पदस्थ रहे सक्षम अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में आ सकती है।