
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। नए आपराधिक कानूनों के तहत डिजिटल साक्ष्य संकलन को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में विवेचकों को बड़ी सुविधा मिली है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जिले के विवेचकों को 208 मोबाइल डेटा टर्मिनल (एमडीटी) डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं। इन उपकरणों का वितरण मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में आइजी रामगोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह ने किया।
एएसपी मधुलिका सिंह ने बताया कि नए कानून लागू होने के बाद घटनास्थल से डिजिटल साक्ष्य जुटाने में कई व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही थीं। अब एमडीटी डिवाइस मिलने से विवेचकों को अपने निजी मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करना पड़ेगा। इससे निजी डाटा और पुलिस जांच संबंधी डाटा अलग रहेगा तथा मोबाइल की मेमोरी भरने या डाटा प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी समाप्त होंगी।
उन्होंने बताया कि इन डिवाइसों के माध्यम से विवेचक घटनास्थल पर ही फोटो, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्य एकत्र कर उन्हें सीधे सीसीटीएनएस पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। इससे साक्ष्यों की सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ की आशंका भी कम होगी। डिजिटल साक्ष्य तत्काल आनलाइन अपलोड होने से विवेचना की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और व्यवस्थित होगी।जांच में देरी कम होगी तथा अभियोग पत्र समय पर न्यायालय में प्रस्तुत किए जा सकेंगे। इसका सीधा लाभ अपराधों के शीघ्र निराकरण और आरोपियों को समयबद्ध सजा दिलाने में मिलेगा।
कार्यक्रम में विवेचकों को एमडीटी डिवाइस के उपयोग, डिजिटल साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया तथा नए आपराधिक कानूनों के तहत निर्धारित प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग से पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
क्या है मोबाइल डेटा टर्मिनल
मोबाइल डेटा टर्मिनल (एमडीटी) पुलिस विवेचकों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया डिजिटल उपकरण है। इसका उपयोग घटनास्थल से फोटो, वीडियो और अन्य इलेक्ट्रानिक साक्ष्य सुरक्षित तरीके से संकलित करने के लिए किया जाएगा। यह डिवाइस सीधे पुलिस के सीसीटीएनएस नेटवर्क से जुड़ा रहेगा, जिससे विवेचक मौके पर ही साक्ष्य अपलोड कर सकेंगे। पहले जांच अधिकारी अपने निजी मोबाइल का उपयोग करते थे, जिससे निजी और सरकारी डाटा एक ही डिवाइस में रहता था तथा मेमोरी, डाटा सुरक्षा और तकनीकी समस्याएं सामने आती थीं। एमडीटी मिलने के बाद जांच संबंधी पूरा कार्य अलग और सुरक्षित प्लेटफार्म पर होगा। इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और जांच प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनेगी।
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विवेचना होगी तेज, न्यायालय में जल्द पेश होगा चालान
एमडीटी डिवाइस का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि घटनास्थल से जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य तुरंत आनलाइन सुरक्षित हो जाएंगे। इससे साक्ष्यों को अलग से ट्रांसफर करने या सुरक्षित रखने में लगने वाला समय बचेगा। जांच अधिकारी मौके से लौटते ही दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे और जांच में तेजी आएगी। डिजिटल रिकार्ड सुरक्षित रहने से साक्ष्यों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। पुलिस का मानना है कि इससे अभियोग पत्र समय पर न्यायालय में प्रस्तुत किए जा सकेंगे और मामलों के शीघ्र निराकरण में मदद मिलेगी। नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जिले के 208 विवेचकों को दिया गया डिवाइस
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जिले के अलग-अलग थानों और साइबर सेल के लिए 208 एमडीटी डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं। इनका वितरण आइजी रामगोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह की मौजूदगी में विवेचकों को किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक तकनीक से लैस यह पहल पुलिसिंग को अधिक स्मार्ट और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे जांच अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और डिजिटल साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीक आधारित होगी। भविष्य में अपराधों की विवेचना अधिक पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेगी, जिससे आम जनता को भी त्वरित न्याय दिलाने में सहायता मिलेगी।