
बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अगहन जिसे मार्गशीर्ष मास भी कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार साल का नौवां महीना अगहन का होता है। सनातन धर्म में इसका विशेष महत्व है। ये मास भगवान श्री कृष्ण के प्रिय माह में से एक माना जाता है। घर के आंगन रंगोली से सजेगी। अल्पना व फूलों में मां भगवती के चरण नजर आएंगे। मान्यता है कि अगहन में उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं के घर में अपार सुख-समृद्धि आती है। सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
संस्कारधानी में बुधवार की शाम पूजन सामग्री खरीदने बाजार में जबरदस्त भीड़ उमड़ी। दिनभर लोग पूजन सामग्री और सीजन के फल खरीदने जुटे रहे। गोल बाजार, सदर बाजार, बृहस्पति बाजार, बुधवारी और पुराना बस स्टैंड सहित मंगला, तिफरा और सरकंडा क्षेत्र के बाजार में लोगों ने खूब समान खरीदे। इस साल अगहन मास नौ नवंबर से शुरू होकर नौ दिसंबर तक रहेगा। गुरुवार को भोर होते ही मां की पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। महिलाओं ने घर-द्वार सजाने के साथ ही पूजा की तैयारी बुधवार से ही शुरू कर दी है। बुधवार को श्रद्धालु घर के द्वार से लेकर पूजा स्थल तक चावल आटे के घोल से मां लक्ष्मी के पद चिन्ह बनाए गए। साथ ही आंगन में रंगोली भी सजने लगा। गुरुवार की सुबह सूर्य निकलने से पहले गृह लक्ष्मियां यानी महिलाएं स्नान-ध्यान कर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करेंगी। यही क्रम दोपहर व शाम को भी चलेगा। इस बीच मां को तीनों समय अलग-अलग प्राकर के भोग अर्पित किए जाएंगे।
स्नान-दान का बड़ा महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित वासुदेव शर्मा के मुताबिक इस बार अगहन माह में कुल चार गुरुवार रहेंगे। शास्त्रगत मान्यताओं के आधार पर अगहन गुरुवार में व्रत रखने का विधान है। इस दिन स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प किया जाता है और शाम को चंद्रमा के उदित होने के उपरांत पुष्प, नैवेध, धूम, दीप प्रज्वलित कर भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्रदेव की कृपा प्राप्त होती है।
अगहन मां लक्ष्मी का महीना
पौराणिक मान्यतानुसार अगहन माह महालक्ष्मी का महीना माना गया है। इस माह के गुरुवार को धन देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से सुख-शांति व समृद्धि मिलती है। मान्यता है कि इस माह मां लक्ष्मी महीने भर पृथ्वी में विचरण करती हैं। गुरुवार को इनका आगमन ऐसे भक्त के यहां होता है, जिनके घर में साफ-सफाई, सजावट व मन, वचन और कर्म से पूरी सात्विकता रहती है।