हिचकोले खाते गुजर रहे वाहन, हादसों का डर... अमरकंटक-पेंड्रा मार्ग के गहरे गड्ढों ने बढ़ाई राहगीरों की मुसीबत
अमरकंटक से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को जोड़ने वाले चारों मार्ग बेहद जर्जर हैं। खराब सड़कों और मलबे के कारण पर्यटकों, विद्यार्थियों और व्यापारियों को भारी परेशानी हो रही है, जिससे पर्यटन भी प्रभावित है।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 01:25:55 PM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 01:25:55 PM (IST)
अमरकंटक-पेंड्रा मार्ग के गहरे गड्ढों ने बढ़ाई राहगीरों की मुसीबत। (नईदुनिया)HighLights
- अमरकंटक-गौरेला-पेंड्रा के चारों प्रमुख मार्ग जर्जर।
- खराब सड़कों से पर्यटकों और छात्रों को परेशानी।
- करंगरा घाट मार्ग पर 15 किमी सड़क क्षतिग्रस्त।
नईदुनिया प्रतिनिधि, अमरकंटक। प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थस्थल और पर्यटन केंद्र अमरकंटक से छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को जोड़ने वाले चारों प्रमुख मार्गों की हालत बेहद खराब है। जर्जर सड़कों, गहरे गड्ढों, पहाड़ियों से आए मलबे और क्षतिग्रस्त पुलियों के कारण पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वर्षाकाल के दौरान क्षतिग्रस्त हुए मार्गों की बारिश थमने के बाद भी मरम्मत नहीं होने से समस्या बनी हुई है। इन मार्गों से प्रतिदिन आवागमन करने वाले लोगों के अनुसार, सड़क की बदहाली के कारण कम दूरी तय करने में भी काफी समय लग रहा है। कई जगह वाहनों को बेहद धीमी गति से निकालना पड़ता है। ऐसे में दुर्घटना की आशंका के साथ वाहनों को नुकसान पहुंचने का खतरा भी बना हुआ है।
विश्वविद्यालय आने-जाने वाले विद्यार्थी और कर्मचारी परेशान
- अमरकंटक से विश्वविद्यालय क्षेत्र की ओर करंगरा घाट और झगराखांड होते हुए जाने वाला लगभग 40 किलोमीटर लंबा मार्ग भी जर्जर हो चुका है। बताया जा रहा है कि वर्षाकाल के दौरान इस मार्ग के करीब 15 किलोमीटर हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा है। सड़क कई स्थानों पर टूटकर क्षतिग्रस्त हो गई है। विशेषकर घाट वाले हिस्से में आवागमन कठिन हो गया है।
- इस मार्ग से विश्वविद्यालय आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले करीब डेढ़ घंटे में पूरा होने वाला सफर अब दो घंटे या उससे अधिक समय में पूरा हो रहा है। समय पर विश्वविद्यालय पहुंचने के लिए निकलने वाले विद्यार्थियों और कर्मचारियों को अतिरिक्त समय लेकर घर से रवाना होना पड़ रहा है। ऐसे में मार्ग की मरम्मत की आवश्यकता बढ़ गई है।
पर्यटन और व्यापार पर पड़ रहा असर
- अमरकंटक में मां नर्मदा के उद्गम स्थल के दर्शन-पूजन और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से पर्यटक और तीर्थयात्री पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे श्रद्धालु भी शामिल होते हैं, जो गौरेला-पेंड्रा क्षेत्र के पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन के माध्यम से अमरकंटक आते-जाते हैं। ऐसे में अमरकंटक को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से जोड़ने वाले चारों मार्गों की बदहाल स्थिति यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन गई है।
- सफर में अधिक समय लगने, वाहनों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका और दुर्घटना के खतरे के कारण यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ रही है। सड़कें खराब होने से व्यापारियों और नागरिकों को भी आवागमन में कठिनाई हो रही है। पर्यटन पर निर्भर स्थानीय कारोबार के लिए भी सुगम सड़क संपर्क महत्वपूर्ण है।
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