बिलासपुर में एक्टिवा से गिरकर ड्राइवर की मौत, बीमा कंपनी को देना होगा 15 लाख मुआवजा
बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक्टिवा दुर्घटना में वाहन मालिक की मौत पर स्वजनों को 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा है। कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।
Publish Date: Sun, 25 Oct 2026 05:32:13 PM (IST)Updated Date: Sun, 25 Oct 2026 05:32:13 PM (IST)
बिलासपुर में एक्टिवा से गिरकर ड्राइवर की मौत। (एआई जनरेटेड)HighLights
- हाई कोर्ट ने 15 लाख मुआवजे का आदेश रखा बरकरार।
- एक्टिवा दुर्घटना में वाहन मालिक शंकर की हुई थी मौत।
- बीमा कंपनी बजाज एलियांज की अपील कोर्ट ने की खारिज।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: एक्टिवा चलाते समय दुर्घटना में वाहन मालिक की मौत होने पर उसकी पत्नी और बेटे को 15 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है। बीमा कंपनी ने दावा प्रकरण की सुनवाई और अपनी जिम्मेदारी को चुनौती दी थी। जस्टिस संतोष शर्मा ने स्पष्ट किया कि जब बीमा पॉलिसी में वाहन मालिक और चालक के व्यक्तिगत दुर्घटना जोखिम का स्पष्ट प्रावधान है, तो उसके तहत मुआवजे का दावा मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में किया जा सकता है।
अदालत ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी। मामला रायपुर निवासी शंकर रमानी की मौत से जुड़ा है। 31 अगस्त 2019 को काम खत्म करने के बाद वह अपनी एक्टिवा से घर लौट रहे थे। चूना भट्ठी स्थित शराब दुकान के पास वह वाहन से गिर गए और गंभीर चोटें आने के कारण उनकी मौत हो गई। उस समय उनकी उम्र करीब 44 वर्ष थी और वह कपड़ों के खुदरा कारोबार से जुड़े थे।
शंकर की पत्नी कोमल रमानी और बेटे राहुल ने रायपुर के चतुर्थ अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 15 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। अधिकरण ने 18 अगस्त 2022 को दावा स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इस राशि पर दावा आवेदन पेश करने की तारीख से भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी निर्धारित किया गया।
पालिसी में था 15 लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा
- बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने हाई कोर्ट में दलील दी कि दावा निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत पेश नहीं किया गया था। कंपनी ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा का दावा खारिज होने के बाद स्वजन को उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उपाय अपनाना चाहिए था।
कंपनी ने पालिसी में वाहन मालिक-चालक के जोखिम की जिम्मेदारी होने पर भी सवाल उठाया। परिजनों की ओर से बताया गया कि पालिसी में वाहन मालिक-चालक के व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा के लिए 15 लाख रुपये का प्रविधान था। इसके लिए 331 रुपये अतिरिक्त प्रीमियम भी लिया गया था। यह भी पढ़ें- CG के 15 हजार शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ, शिक्षा विभाग ने जारी की वरिष्ठता सूची
बीमा कंपनी साबित नहीं कर सकी पालिसी का उल्लंघन
- हाई कोर्ट ने पालिसी का परीक्षण करने पर पाया कि उसमें वाहन मालिक-चालक के व्यक्तिगत दुर्घटना जोखिम के लिए 15 लाख रुपये का बीमा शामिल था। बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि दुर्घटना के समय शंकर के पास वैध और प्रभावी वाहन चालन अनुज्ञप्ति नहीं थी या पालिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ था।
- अदालत ने कहा कि केवल उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उपाय उपलब्ध होने से दावा अधिकरण में मुआवजे की मांग सुनवाई योग्य होने पर रोक नहीं लगती। हाई कोर्ट ने अधिकरण के आदेश में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए बीमा कंपनी की अपील खारिज क र दी।