नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः बड़े और प्रतिष्ठित मालाबार ज्वेलर्स का नकाब रविवार को उतर गया। एक हालमार्क और एचयूआइडी अंकित सोने के कड़े की जांच ने ऐसा विवाद खड़ा किया कि सराफा बाजार में हड़कंप मच गया। ग्राहक बलविंदर सिंह राजपाल के कड़े को मशीन ने कथित तौर पर पहले 20 कैरेट बताया, मशीन रीफ्रेश होने के बाद वही कड़ा 22 कैरेट हो गया।
सराफा एसोसिएशन के विरोध के बाद तारबाहर पुलिस ने जुर्म दर्ज कर गोल्ड टेस्टिंग मशीन के साथ डीवीआर जब्त कर जांच शुरू कर दी है। सोने की शुद्धता जांच को लेकर मैग्नेटो माल के पास स्थित मालाबार ज्वेलर्स में सामने आया यह मामला अब केवल ग्राहक और शोरूम के बीच का विवाद नहीं रह गया है।
एक ही कड़े की जांच में कथित तौर पर अलग-अलग कैरेट की रीडिंग सामने आने के बाद पूरे सराफा कारोबार में सवाल उठ खड़े हुए हैं। बिलासपुर निवासी बलविंदर सिंह राजपाल अपना सोने का कड़ा एक्सचेंज कराने मालाबार ज्वेलर्स पहुंचे थे।
ग्राहक का कहना है कि यह कड़ा उन्होंने करीब एक वर्ष पहले एसके ज्वेलर्स, राजीव प्लाजा से खरीदा था। कड़े पर हालमार्क और एचयूआइडी अंकित था तथा उसे 22 कैरेट के रूप में खरीदा गया था। शोरूम में एक्सचेंज प्रक्रिया के दौरान गोल्ड टेस्टिंग मशीन से जांच की गई। ग्राहक के अनुसार मशीन की रीडिंग में कड़ा कथित तौर पर 20 कैरेट बताया गया।
22 कैरेट के हालमार्क वाले कड़े को 20 कैरेट बताए जाने के बाद ग्राहक हैरान रह गया और विवाद शुरू हो गया। मामले की जानकारी मिलने पर उस ज्वेलरी दुकान के संचालक ने भी इसे गंभीरता से लिया। बताया गया कि वह स्वयं ग्राहक के परिचित के रूप में मालाबार ज्वेलर्स पहुंचे और उसी कड़े की दोबारा टेस्टिंग कराई। दावा है कि दूसरी जांच में भी मशीन ने 20 कैरेट की रीडिंग दिखाई। \
इसके बाद जब संचालक ने अपना परिचय देते हुए कड़े की हालमार्किंग और एचयूआइडी का मुद्दा उठाया तो जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि मशीन को रीफ्रेश कर दोबारा टेस्टिंग की गई और इस बार उसी कड़े की रीडिंग 22 कैरेट आ गई। एक ही कड़े की 20 और फिर 22 कैरेट रीडिंग सामने आने की सूचना मिलते ही सराफा कारोबारियों में आक्रोश फैल गया।
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छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में व्यापारी मालाबार ज्वेलर्स पहुंचे और जांच प्रक्रिया को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। विवाद बढ़ने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची। एसके ज्वेलर्स के संचालक सागर केशरी की शिकायत पर तारबाहर पुलिस ने मालाबार ज्वेलर्स के मैनेजर, कैरेटोमीटर आपरेटर व अन्य कर्मचारी के खिलाफ बीएनएस की धारा 318 (4), 3 (5) के तहत जुर्म दर्ज कर सोने की जांच में इस्तेमाल की गई गोल्ड टेस्टिंग मशीन और डीवीआर को जब्त कर लिया।
अब पुलिस मशीन की तकनीकी स्थिति, कैलिब्रेशन, टेस्टिंग प्रक्रिया और डीवीआर में दर्ज घटनाक्रम की जांच करेगी। मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस कड़े को पहले 20 कैरेट बताया गया, वह मशीन रीफ्रेश होने के बाद 22 कैरेट कैसे हो गया? जवाब पुलिस जांच, तकनीकी रिपोर्ट और अधिकृत परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।
मशीन के भरोसे कारोबारी की साख पर वार नहीं: कमल
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी ने कहा कि यह केवल एक कड़े का मामला नहीं है, बल्कि सराफा कारोबारियों की विश्वसनीयता और उपभोक्ता के भरोसे से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि किसी मशीन की रीडिंग के आधार पर छोटे और पुश्तैनी ज्वेलर्स की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। यदि किसी गोल्ड टेस्टिंग मशीन की रीडिंग में अंतर आता है तो उसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच होनी चाहिए। बड़े ज्वेलरी शोरूमों में इस्तेमाल हो रही मशीनों की कैलिब्रेशन और टेस्टिंग सिस्टम की नियमानुसार जांच की मांग की है।
कड़ा 20 से 22 कैरेट कैसे?: श्रीकांत
सराफा कारोबारी श्रीकांत पांडेय ने कहा कि एक ही कड़े की जांच में पहले 20 कैरेट और बाद में 22 कैरेट की रीडिंग आने का दावा गंभीर तकनीकी सवाल पैदा करता है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि पहली और दूसरी टेस्टिंग के दौरान मशीन की सेटिंग, कैलिब्रेशन और आपरेटिंग प्रोसेस क्या थी। पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यह भी सामने लाया जाए कि रीडिंग में बदलाव मशीन की तकनीकी त्रुटि, टेस्टिंग प्रक्रिया या किसी अन्य कारण से हुआ।
रात 8:59 बजे काल, मालाबार का पक्ष नहीं
मामले में मालाबार ज्वेलर्स का पक्ष जानने के लिए नईदुनिया की ओर से रात 8:59 बजे नंबर 07752467916 पर काल किया गया। फोन रिसीव करने वाले कर्मचारियों से शोरूम के संचालक या अधिकृत अधिकारी से बात कराने का आग्रह किया गया, लेकिन कर्मचारियों ने बात कराने को लेकर टालमटोल शुरू कर दिया। कुछ देर बाद काल काट दिया गया। इसके बाद दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। इस कारण समाचार लिखे जाने तक मालाबार ज्वेलर्स का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
पुलिस के हाथ मशीन और डीवीआर, अब खुलेंगी टेस्टिंग की परतें
पुलिस द्वारा जब्त की गई गोल्ड टेस्टिंग मशीन और डीवीआर अब इस पूरे विवाद की जांच में अहम साबित हो सकते हैं। डीवीआर रिकार्डिंग से यह स्पष्ट हो सकता है कि कड़े की टेस्टिंग किस तरह की गई, पहली रीडिंग क्या थी और बाद में मशीन रीफ्रेश होने के बाद क्या परिणाम सामने आया।
पुलिस मशीन की तकनीकी स्थिति, कैलिब्रेशन रिकार्ड और सर्विस हिस्ट्री की भी जांच कर सकती है। साथ ही हालमार्क और एचयूआइडी की अधिकृत पुष्टि तथा स्वतंत्र टेस्टिंग के बाद ही कड़े की वास्तविक शुद्धता को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।