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साठ के दशक का जर्जर हो चला बिलासपुर शहर का ऐतिहासिक कम्पोजिट भवन, छत से गिर रहा प्लास्टर, कर्मचारी और नागरिक परेशान

वर्ष 1962 में बने शहर के ऐतिहासिक कम्पोजिट भवन की स्थिति जर्जर हो चुकी है। बारिश में छत टपकने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से परेशान लिपिक वर्गीय कर्म...और पढ़ें

By kranti namdevEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 11:41:59 AM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 11:41:59 AM (IST)
साठ के दशक का जर्जर हो चला बिलासपुर शहर का ऐतिहासिक कम्पोजिट भवन, छत से गिर रहा प्लास्टर, कर्मचारी और नागरिक परेशान
छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन

HighLights

  1. छतों का प्लास्टर गिरना और जलभराव कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
  2. गलियारों में पानी जमा होने से महत्वपूर्ण फाइलों के नष्ट होने की आशंका।
  3. कर्मचारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी दी है।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। शहर के हृदय स्थल में स्थित पुरानी कम्पोजिट भवन की जर्जर स्थिति को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने भवन की तत्काल मरम्मत और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है और चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

वर्ष 1962 में निर्मित ऐतिहासिक भवन में वर्तमान में रजिस्ट्री कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कृषि विभाग, पंचायत एवं समाज कल्याण, आदिवासी विकास, मत्स्य और आबकारी विभाग व कई महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालय संचालित हो रहे हैं। इन कार्यालयों में रोजाना सैकड़ों कर्मचारी काम करते हैं और हजारों की संख्या में आम नागरिक अपने काम के सिलसिले में यहां पहुंचते हैं।


वीओ के अनुसार, रखरखाव के अभाव में अब भवन की स्थिति बेहद चिंताजनक और खतरनाक होती जा रही है। छतों का प्लास्टर टूट-टूटकर नीचे गिर रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। बारिश के इस मौसम में छतों से लगातार पानी टपकने के कारण दफ्तरों और गलियारों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे फाइलों के खराब होने और लोगों के फिसलकर घायल होने का खतरा बना रहता है।

संघ ने प्रशासन से मांग की है कि छतों की वाटरप्रूफिंग कराई जाए, पूरे परिसर का जीर्णोद्धार हो, बिजली के लिए अलग ट्रांसफार्मर लगाया जाए। इसके साथ ही पीछे व्यवस्थित वाहन स्टैंड बनाने और जर्जर कमरों में से एक कमरा कर्मचारी कल्याण भवन के लिए आवंटित करने की भी मांग प्रमुखता से उठाई गई है।

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वीआईपी दफ्तरों के गलियारो में भर रहा पानी

कम्पोजिट भवन के भीतर स्थित जिला शिक्षा अधिकारी और रजिस्ट्री कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों के गलियारों में बारिश का पानी भर रहा है। छतों से पानी रिसने के कारण न केवल कर्मचारी बल्कि अपने जरूरी काम से आने वाले आम नागरिक भी बेहद परेशान हैं। कर्मचारियों को डर है कि कहीं पानी से महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज और फाइलें नष्ट न हो जाएं।

बुनियादी सुविधाओं का टोटा, वाहन स्टैंड और पेयजल की मांग

भवन में आने वाली महिलाओं और पुरुषों के लिए स्वच्छ सुलभ शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा परिसर में स्वच्छ पेयजल और निस्तारी की भारी समस्या बनी हुई है। कर्मचारी संघ ने मांग की है कि भवन के पीछे एक व्यवस्थित और सुरक्षित वाहन स्टैंड का निर्माण कराया जाए ताकि अव्यवस्थित पार्किंग और जाम से निजात मिल सके।