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2027 में बदलेगी बिलासपुर की तस्वीर, ₹160 करोड़ से अधिक के 4 मेगा प्रोजेक्ट्स से निखरेगा शहर का स्वरूप

Bilaspur Smart City Development 2026-27: वर्ष 2027 में शहर को ऐसी सुविधाओं की सौगात मिलने जा रही है, जो शिक्षा, सार्वजनिक परिवहन, पार्किंग और बड़े आयो...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 07:41:03 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 07:41:03 PM (IST)
2027 में बदलेगी बिलासपुर की तस्वीर, ₹160 करोड़ से अधिक के 4 मेगा प्रोजेक्ट्स से निखरेगा शहर का स्वरूप
4 मेगा प्रोजेक्ट्स से निखरेगा शहर का स्वरूप। (AI Generated Image)

HighLights

  1. पुराने बस स्टैंड में बनेगी पहली आटोमेटेड मल्टीलेवल पार्किंग
  2. 80 कारों के लिए स्वचालित लिफ्ट सिस्टम, 1 माह में होगी शुरू
  3. जूना बिलासपुर में 13.10 एकड़ में विकसित होगी शैक्षणिक सिटी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। बिलासपुर शहर के विकास का अगला पड़ाव अब केवल सड़क, नाली और भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहने वाला है। वर्ष 2027 में शहर को ऐसी सुविधाओं की सौगात मिलने जा रही है, जो शिक्षा, सार्वजनिक परिवहन, पार्किंग और बड़े आयोजनों के लिहाज से बिलासपुर की तस्वीर बदल सकती हैं। स्मार्ट सिटी और नगर निगम की अलग-अलग परियोजनाओं के जरिए शहर में कन्वेंशन सेंटर, ई-बस टर्मिनल, आटोमेटेड मल्टीलेवल पार्किंग और एजुकेशन हब आकार ले रहे हैं।

कुछ परियोजनाएं अंतिम चरण में

इनमें कुछ परियोजनाएं अंतिम चरण में हैं तो कुछ पर निर्माण और अधोसंरचना विकास का काम चल रहा है। खास बात यह है कि इन परियोजनाओं का असर शहर के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ेगा। कोनी में पढ़ाई और परिवहन से जुड़ी सुविधाएं विकसित होंगी तो पुराने बस स्टैंड में पार्किंग की समस्या से राहत मिलेगी।


वहीं कोनी में ही बन रहा कन्वेंशन सेंटर बड़े आयोजनों के लिए शहर को नया मंच देगा और मधुबन-जूना बिलासपुर का प्रस्तावित एजुकेशन हब बिलासपुर को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए और मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।

1. कोनी में बनेगा शहर का नया आयोजन केंद्र

  • गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के गेट के पास लगभग सवा एकड़ में 29 करोड़ 51 लाख रुपये की लागत से कन्वेंशन सेंटर तैयार किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड इस प्रोजेक्ट को विकसित कर रहा है। निर्माण के अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं और अंतिम फिनिशिंग का काम चल रहा है।

  • इसके करीब डेढ़ माह में पूरा होने की उम्मीद है। यह ग्राउंड फ्लोर समेत कुल चार मंजिला भवन होगा। सबसे बड़ी खासियत तीसरे तल पर बनने वाला 700 सीट क्षमता का आडिटोरियम है। इससे बड़े सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सरकारी आयोजनों के लिए शहर को एक बड़ा और व्यवस्थित मंच मिलेगा।
  • कन्वेंशन सेंटर में केवल आयोजन की सुविधा ही नहीं होगी। ग्राउंड फ्लोर पर 16 दुकानें रहेंगी। प्रथम तल पर कार्यालय, कोचिंग और ट्यूटोरियल संस्थानों के लिए 16 स्थान प्रस्तावित हैं। दूसरे तल पर 500 सीट क्षमता की लाइब्रेरी होगी।
  • इसके अलावा वीआईपी रूम, वेटिंग हाल, लैंडस्केपिंग, चार पहिया और दोपहिया पार्किंग, शौचालय तथा तीन लिफ्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं भी रहेंगी। सभा, संगोष्ठी, प्रदर्शनी, कला-साहित्य से जुड़े कार्यक्रम, गीत-संगीत और नाटकों के मंचन के लिए यह परिसर बिलासपुर को बड़े शहरों की तर्ज पर आयोजन सुविधा देगा।
  • 2. 50 ई-बसों के लिए कोनी में बनेगा नया टर्मिनल

    • प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत बिलासपुर को 50 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। इन बसों के संचालन से पहले आवश्यक डिपो और बिजली अधोसंरचना तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। कोनी स्थित मौजूदा सिटी बस डिपो में करीब साढ़े पांच एकड़ में ई-बस टर्मिनल कांप्लेक्स विकसित किया जाएगा।
    • बस डिपो और बीटीएम पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुल 11 करोड़ 45 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। निगम की ओर से निविदा जारी करने की तैयारी पूरी कर ली गई है और इसी सप्ताह टेंडर जारी किए जाने की योजना है।

  • ई-बस टर्मिनल में 13 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके अलावा यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय, बसों की मरम्मत और रखरखाव के लिए वर्कशॉप, कार्यालय, कवर्ड व ओपन पार्किंग तथा ग्रीन एरिया विकसित किया जाएगा। इस अधोसंरचना के तैयार होने के बाद शहर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का रास्ता साफ होगा।
  • इससे सार्वजनिक परिवहन को नया विकल्प मिलेगा और पेट्रोल-डीजल आधारित परिवहन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। ई-बसों के संचालन से कार्बन उत्सर्जन, वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है। इसके साथ ही शहर में सार्वजनिक परिवहन को अधिक आधुनिक और ऊर्जा-कुशल बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम होगा।
  • 3. पुराने बस स्टैंड में 80 कारों की पार्किंग, वह भी आटोमेटेड

    • शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में पार्किंग की समस्या दूर करने के लिए आटोमेटेड मल्टीलेवल शटल टाइप कार पार्किंग तैयार की जा रही है। लगभग 12 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से बन रही यह सुविधा निर्माण के अंतिम चरण में है और करीब एक माह के भीतर शहरवासियों को उपलब्ध होने की उम्मीद है।

  • लगभग 10,500 वर्गफीट भूमि पर बनने वाली इस पार्किंग में ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार मंजिल होंगी। यहां एक साथ करीब 80 कारें पार्क की जा सकेंगी। ग्राउंड फ्लोर पर दोपहिया वाहनों की पार्किंग भी होगी।
  • इस पार्किंग की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्वचालित व्यवस्था होगी। वाहन चालक निर्धारित ग्राउंड फ्लोर पर कार लेकर पहुंचेगा। इसके बाद लिफ्ट और शटल सिस्टम की मदद से कार को निर्धारित पार्किंग स्थान तक पहुंचाया जाएगा।
  • प्रवेश के दौरान वाहन की नंबर प्लेट की स्वचालित पहचान होगी और इसके आधार पर पार्किंग पर्ची जारी की जाएगी। भवन में फायर फाइटिंग सिस्टम समेत आवश्यक सुरक्षा इंतजाम भी किए जा रहे हैं।
  • पुराना बस स्टैंड और आसपास का इलाका शहर का प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां व्यवस्थित पार्किंग नहीं होने से सड़क किनारे वाहन खड़े करने की समस्या बनी रहती है। मल्टीलेवल पार्किंग शुरू होने के बाद वाहनों को व्यवस्थित स्थान मिलेगा और सड़क पर बेतरतीब पार्किंग कम होने से यातायात व्यवस्था सुधारने में मदद मिलेगी।
  • 4. 120 करोड़ का एजुकेशन हब बनाएगा बिलासपुर को पढ़ाई का बड़ा केंद्र

    • बिलासपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी योजनाओं में एजुकेशन हब शामिल है। मधुबन-जूना बिलासपुर क्षेत्र में लगभग 5.301 हेक्टेयर यानी 13.10 एकड़ शासकीय भूमि पर इसे विकसित करने की परिकल्पना है। पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 120 करोड़ रुपये है।
    • इसमें 500 सीट का नालंदा परिसर पुस्तकालय, तीन अकादमिक ब्लॉक, छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास, गार्डन और ग्रीन ओपन स्पेस, कैफेटेरिया, पार्किंग, स्मार्ट यूटिलिटी और सुरक्षा अधोसंरचना शामिल होगी।
    • फिलहाल परियोजना के तहत करीब 26.42 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत और प्रगतिरत हैं। इनमें 11.42 करोड़ रुपये की लागत से 500 सीट का नालंदा परिसर बनाया जा रहा है। यहां पब्लिक लाइब्रेरी, डिजिटल लाइब्रेरी, ई-लर्निंग जोन, रीडिंग हाल, बच्चों के लिए रीडिंग एरिया, कैफेटेरिया, लिफ्ट और फायर फाइटिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं होंगी। नालंदा परिसर में फाउंडेशन और प्लिंथ बीम का काम पूरा हो चुका है, जबकि स्टिल्ट लेवल के कॉलम और बीम-स्लैब का काम चल रहा है।
    • तीन अकादमिक ब्लाकों में से दो का निर्माण 15 करोड़ रुपये की लागत से डीएमएफ फंड के तहत चल रहा है। इनमें कोचिंग, प्रशिक्षण, सेमिनार और कौशल विकास के लिए हाल होंगे। तीसरे अकादमिक ब्लाक-सी को स्मार्ट सिटी फंड से करीब सात करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित किया गया है।
    • परिसर के पास पहले से बने अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट के छह ब्लाक भी इस योजना का हिस्सा बनाए जाने की परिकल्पना है। करीब 8.26 करोड़ रुपये से बने इन छह ब्लॉकों में कुल 174 आवासीय यूनिट हैं। इन्हें खाली कराकर छात्र-छात्राओं के छात्रावास के रूप में उपयोग करने की योजना है।
    • इस तरह प्रगतिरत 26.42 करोड़ रुपये के काम, प्रस्तावित सात करोड़ रुपये के तीसरे अकादमिक ब्लाक और पहले से निर्मित 8.26 करोड़ रुपये के आवासीय ब्लाकों को मिलाकर करीब 41.68 करोड़ रुपये की शैक्षणिक और आवासीय अधोसंरचना उपलब्ध हो सकेगी।
    • एजुकेशन हब का उद्देश्य केवल भवन बनाना नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक व्यवस्थित परिसर उपलब्ध कराना है। यहां गरीब और निम्न आय वर्ग के विद्यार्थियों को कम लागत में पढ़ाई, लाइब्रेरी, आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
    • भविष्य में अरपा नदी के किनारे कनेक्टर रोड/रिवरफ्रंट रोड, पार्किंग, स्मार्ट यूटिलिटी और अन्य सुविधाएं भी चरणबद्ध तरीके से विकसित करने का प्रस्ताव है। पूरी परियोजना को अर्बन चैलेंज फंड के तहत आगे बढ़ाने की योजना है।

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    चार परियोजनाएं, चार बड़े बदलाव

    कन्वेंशन सेंटर बिलासपुर को बड़े आयोजनों का मंच देगा। ई-बस टर्मिनल शहर के सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक दौर में ले जाएगा। आटोमेटेड पार्किंग पुराने शहर की पार्किंग और ट्रैफिक समस्या को कम करने में मदद करेगी। वहीं एजुकेशन हब बिलासपुर की पहचान को एक बड़े शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षा केंद्र के रूप में और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। इन चारों परियोजनाओं के पूरी तरह आकार लेने के साथ 2027 बिलासपुर के शहरी विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण साल साबित हो सकता है।