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बैंकिंग धोखाधड़ी पर लगाम कसने की तैयारी, बिलासपुर पुलिस और बैंकों ने बनाई नई रणनीति

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के बीच समन्वय बैठक आयोजित की गई। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देशन में हुए इस 'साइबर जागृति अभियान' के तहत बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे किसी भी व्यक्ति या फर्म का नया खाता खोलने से पहले दस्तावेजों की जांच के साथ अनिवार्य रूप से भौतिक सत्यापन करें।

By Mohammad Safraj MemonEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 26 Aug 2026 07:42:57 PM (IST)Updated Date: Wed, 26 Aug 2026 07:42:57 PM (IST)
बैंकिंग धोखाधड़ी पर लगाम कसने की तैयारी, बिलासपुर पुलिस और बैंकों ने बनाई नई रणनीति
परिचर्चा के दौरान मौजूद एसएसपी रजनेश सिंह और अधिकारी

HighLights

  1. खाता खोलते वक्त अब होगा भौतिक सत्यापन।
  2. क्यूआर कोड फ्रॉड और ओटीपी साझा न करने की अपील की गई।
  3. साइबर अपराध रोकने के लिए एसएसपी का कड़ा निर्देश।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं के बीच पुलिस ने बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय मजबूत करने की दिशा में पहल की है। बुधवार को रक्षित केंद्र स्थित चेतना हाल में साइबर जागृति अभियान के तहत शहर के विभिन्न बैंकों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ चर्चा-परिचर्चा और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देशन में हुआ। इसमें आनलाइन बैंकिंग फ्राड, फर्जी केवाइसी, संदिग्ध लेनदेन और डिजिटल ठगी से बचाव पर विस्तार से चर्चा की गई। आरआइ भूपेंद्र गुप्ता ने बताया कि मल्टीपल ट्रांजेक्शन, संदिग्ध गतिविधियों और फर्जी केवाइसी वाले खातों पर नजर रखी जाती है। ऐसी गतिविधि मिलने पर पुलिस को सूचना दी जाती है।


नए खाताधारकों को वेलकम काल के माध्यम से साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया जाता है। वहीं सेवानिवृत्त और वरिष्ठ नागरिकों को भी समय-समय पर बैंक बुलाकर साइबर सुरक्षा की जानकारी दी जाती है। एसएसपी रजनेश सिंह ने बैंक अधिकारियों से कहा कि ग्राहकों के खातों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखें।

किसी व्यक्ति या फर्म का खाता खोलने से पहले दस्तावेजों की जांच के साथ भौतिक सत्यापन भी किया जाए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी अक्सर फर्जी या किराये के बैंक खातों का उपयोग ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए करते हैं। इसलिए संदिग्ध लेनदेन सामने आने पर बैंक तत्काल संबंधित थाना प्रभारी को सूचना दें।

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कार्यक्रम में फर्जी बैंक काल, केवाइसी अपडेट के नाम पर ठगी, फिशिंग लिंक, फर्जी वेबसाइट व मोबाइल एप, एपीके फाइल, क्यूआर कोड फ्राड, इंटरनेट मीडिया ठगी, डिजिटल अरेस्ट और ओटीपी, पिन, सीवीवी तथा पासवर्ड से जुड़े अपराधों की जानकारी दी गई। इस दौरान लोगों से अपील की गई कि वे गोपनीय बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें और अनजान लिंक अथवा एपीके फाइल पर क्लिक या इंस्टाल न करें।

फर्जी खातों पर पुलिस की नजर, भौतिक सत्यापन पर जोर

साइबर अपराधों में बैंक खातों के दुरुपयोग को रोकने के लिए पुलिस ने बैंक अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। साइबर जागृति अभियान के तहत चेतना हाल में आयोजित कार्यक्रम में एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि किसी व्यक्ति या फर्म का खाता खोलने से पहले दस्तावेजों की जांच के साथ भौतिक सत्यापन भी किया जाना चाहिए।

बैंक अधिकारियों ने बताया कि मल्टीपल ट्रांजेक्शन, संदिग्ध गतिविधियों और फर्जी केवाइसी वाले खातों की निगरानी की जाती है। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर पुलिस को सूचना दी जाती है। नए खाताधारकों को वेलकम काल के जरिए साइबर सुरक्षा की जानकारी भी दी जा रही है। पुलिस ने बैंकों से संदिग्ध लेनदेन की सूचना तत्काल संबंधित थाना प्रभारी को देने कहा है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

ओटीपी और पिन मांगने वालों से रहें सावधान

साइबर जागृति अभियान के दौरान पुलिस और बैंक अधिकारियों ने नागरिकों को आनलाइन ठगी से बचने के उपाय बताए। फर्जी बैंक काल, केवाइसी अपडेट, फिशिंग लिंक, क्यूआर कोड, फर्जी वेबसाइट, मोबाइल एप, एपीके फाइल , सोशल मीडिया ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों की जानकारी दी गई।

पुलिस ने कहा कि ओटीपी, पिन, सीवीवी और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने और किसी के कहने पर संदिग्ध एपीके या मोबाइल एप इंस्टाल करने से बचें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें, ताकि ठगी की रकम को समय रहते होल्ड कराने में मदद मिल सके।

नुक्कड़-नाटक से साइबर जागरूकता का संदेश

पुलिस ने साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने नुक्कड़-नाटक कार्यक्रम की शुरुआत की है। शहर के चौक-चौराहों, माल, बाजार परिसर और अन्य प्रमुख स्थानों पर कलाकार अभिनय के माध्यम से नागरिकों को साइबर ठगी से बचने के उपाय बताएंगे। पुलिस का उद्देश्य साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी को आम लोगों तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।

कार्यक्रम में सोशल मीडिया के माध्यम से साइबर जागृति प्रश्नोत्तरी भी कराई गई, जिसमें प्रतिभागियों को ई-मेल के जरिए प्रमाण पत्र दिए गए। पुलिस ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। पुलिस, बैंक और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही सुरक्षित डिजिटल समाज बनाया जा सकता है।

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