
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने शहर में खाद्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए ''''ईट राइट'''' इनिशिएटिव के तहत सघन आडिट अभियान चलाया। इस दौरान प्रमुख अस्पतालों, धार्मिक स्थलों और खान-पान के केंद्रों की जांच की गई। विभाग ने कई स्थानों को मानकों के अनुरूप ढालने के निर्देश दिए, वहीं कुछ जगहों पर किचन में साफ-सफाई के स्तर पर सवाल भी उठे हैं।
कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर चली इस कार्रवाई में अपोलो हास्पिटल को ''''ईट राइट कैंपस'''', महामाया मंदिर रतनपुर को ''''ईट राइट प्लेस आफ वर्शिप'''' और मरीन ड्राइव चौपाटी को ''''क्लीन स्ट्रीट फूड हब'''' के तौर पर आडिट किया गया। इसके अलावा गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कैफेटेरिया, सेंट्रल किचन समेत कुल 5 फर्मों की हाइजीन रेटिंग की जांच की गई।
जांच के दौरान विभाग की टीम ने संस्थानों में आईईसी गतिविधियों के तहत पोस्टर का वितरण किया और उन्हें प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। हालांकि, निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर किचन पूरी तरह से हाइजिनिक (स्वच्छ) नहीं पाए गए। इसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने संबंधित फर्मों को कड़ी चेतावनी दी है और भविष्य में साफ-सफाई के मानकों का पूरी तरह पालन करने की हिदायत दी है।
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क्या है ईट राइट पहल?
''''ईट राइट'''' इनिशिएटिव के तहत खाद्य प्रतिष्ठानों को सुरक्षित भोजन, स्वच्छता और पौष्टिकता के पैमानों पर परखा जाता है। इसमें हाइजीन रेटिंग के माध्यम से ग्राहकों को यह सुनिश्चित कराया जाता है कि वे जो खा रहे हैं, वह स्वास्थ्य की दृष्टि से कितना सुरक्षित है।
वर्जन
ईट राइट पहल का उद्देश्य नागरिकों को शुद्ध और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है। आडिट का मतलब केवल प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना है। जहां कमियां मिली हैं, उन्हें सुधारने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। आगे भी अचानक निरीक्षण का सिलसिला जारी रहेगा।
आरआर देवांगन, एडीशनल फूड कंट्रोलर, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग