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जेल में कस्टोडियल डेथ का मामला: ढाई साल बाद हरकत में आई पुलिस, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब CBI करेगी जांच

बिलासपुर के केंद्रीय जेल में विचाराधीन बंदी श्रवण सूर्यवंशी की मौत के ढाई साल बाद आखिरकार हत्या का मामला दर्ज कर सिविल लाइन पुलिस ने अज्ञात आरोपित के ...और पढ़ें

By Mohammad Safraj MemonEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sat, 15 Aug 2026 02:08:13 PM (IST)Updated Date: Sat, 15 Aug 2026 02:08:13 PM (IST)
जेल में कस्टोडियल डेथ का मामला: ढाई साल बाद हरकत में आई पुलिस, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब CBI करेगी जांच
हिरासत में मौत, जांच के लिए सिविल लाइन थाने पहुंची सीबीआई की टीम (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हिरासत में मौत, जांच के लिए सिविल लाइन थाने पहुंची सीबीआई की टीम
  2. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई को सौंपी गई है जांच की जिम्मेदारी
  3. रिपोर्ट में चोट किसी कठोर एवं भोथरी वस्तु से लगना संभावित बताया गया

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। केंद्रीय जेल में विचाराधीन बंदी श्रवण सूर्यवंशी की मौत के ढाई साल बाद आखिरकार हत्या का मामला दर्ज कर सिविल लाइन पुलिस ने अज्ञात आरोपित के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया। अब सीबीआई इस मामले की जांच में जुट गई है। सीबीआई की टीम शुक्रवार की शाम सिविल लाइन थाने पहुंची।

सीबीआई की टीम ने मामले से संबंधित दस्तावेज का अवलोकन किया है। दस्तावेज लेकर सीबीआई की टीम आगे की जांच करेगी।सीपत क्षेत्र के मोहरा में रहने वाले श्रवण सूर्यवंशी(34) के आबकारी एक्ट के मामले में सीपत पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वह 19 जनवरी 2024 से केंद्रीय जेल में बंद था। जेल में तबीयत बिगड़ने पर 21 जनवरी 2024 को उसे सिम्स अस्पताल भेजा गया।


इलाज के दौरान 22 जनवरी की सुबह उसकी मौत हो गई थी। मामले की न्यायिक जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा ने की। 22 जुलाई 2024 को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में पोस्टमार्टम, एफएसएल, हिस्टोपैथोलाजी रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष दिया गया कि श्रवण की मृत्यु सिर में आई गंभीर चोट और उसकी जटिलताओं के कारण हुई।

रिपोर्ट में चोट किसी कठोर एवं भोथरी वस्तु से लगना संभावित बताया गया। इसके बाद अधिकारियों ने हत्या का अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए। न्यायिक जांच के दौरान मृतक के स्वजन और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। स्वजन ने मौत के कारण की जानकारी नहीं होने की बात कही, जबकि इलाज के दस्तावेजों और न्यायिक जांच रिपोर्ट को हत्या का मामला दर्ज करने का प्रमुख आधार माना गया।

इस आधार पर सिविल लाइन पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया। इधर हिरासत में मौत के मामले में स्वजन ने मुआवजा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हाई कोर्ट में आवेदन किया। बाद में स्वजन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है। शुक्रवार को सीबीआई की टीम सिविल लाइन थाने पहुंची। टीम ने मामले की केस डायरी और मजिस्ट्रेट जांच प्रतिवेदन की कापी का अवलोकन किया है। जल्द ही सीबीआई की टीम केस डायरी लेकर इस मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर सकती है।

पत्नी ने हवलदार पर लगाए थे आरोप

पति की मौत के बाद लहराबाई ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। महिला ने सीपत थाने में पदस्थ हवलदार उमाशंकर राठौर और उसके साथ आए अन्य पुलिसकर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाया था। बाद में न्यायिक जांच के दौरान भी महिला ने हवलदार द्वारा अपने पति को थाने ले जाना बताया। इस सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान पुलिस की ओर से सीपत थाने की डायरी का भी अवलोकन करेगी।

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कई बार कार्रवाई की बात आई थी सामने

न्यायिक जांच के दौरान मजिस्ट्रेट ने श्रवण के स्वजन का बयान लिया था। इसमें यह बात सामने आई कि श्रवण को पुलिस पहले भी कई बार शराब के मामले में ले जा चुकी थी। उसके खिलाफ अवैध शराब के मामले दर्ज किए गए। जनवरी 2024 में भी उसे अवैध शराब के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया।

हिरासत में मौत के मामले में जांच के लिए सीबीआई की टीम सिविल लाइन थाने पहुंची थी। टीम को केस डायरी सौंप दी गई है। अब आगे की जांच सीबीआई करेगी। पंकज पटेल, एएसपी सिटी बिलासपुर।