CG ब्लैकमेलिंग केस: अश्लील मैसेज भेज 2.5 लाख और 2 किलो सोना मांगने वाले को सुप्रीम कोर्ट से झटका
चांपा में महिला को अश्लील संदेश भेजकर 2.50 लाख और दो किलो सोना मांगने के आरोपी छत्तापल चंद्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। जस्टिस अमानुल्लाह और...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 05:09:41 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 05:09:41 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- अश्लील मैसेज भेज 2.5 लाख और सोना मांगने का आरोप।
- हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पांच अक्टूबर को खारिज की।
- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का 31 अगस्त का आदेश बरकरार रखा गया।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: चांपा में एक व्यक्ति की पत्नी को अश्लील और अपमानजनक संदेश भेजने, परिवार को जान से मारने की धमकी देने और 2.50 लाख रुपये व दो किलो सोना मांगने के आरोपित छत्तापल चंद्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं पाते हुए पांच अक्टूबर 2026 को विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। इससे छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का 31 अगस्त 2026 का आदेश बरकरार है। अभियोजन के अनुसार, प्रकाश इंडस्ट्रीज चांपा में प्रबंधक विनय कुमार बाजपेयी ने 28 अप्रैल 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
उनका आरोप था कि 17 से 27 अप्रैल के बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी पत्नी को वाट्सएप पर अश्लील और गाली-गलौज वाले संदेश भेजे। संदेशों में अश्लील वीडियो प्रसारित करने की धमकी देने के साथ 2.50 लाख रुपये और दो किलो सोने की मांग की गई। मांग पूरी नहीं होने पर उनके बेटे की हत्या कर शव हनुमानधारा नदी में फेंकने की धमकी भी दी गई। जांच के दौरान संबंधित मोबाइल नंबर की काल डिटेल खंगाली गई।
पुलिस के अनुसार, नंबर के धारक राहुल बरेठ ने बताया कि उसने अपना व्हाट्सएप खाता सह-आरोपित जानकी सिदार को इस्तेमाल करने दिया था। अभियोजन ने आरोप लगाया कि जानकी सिदार ने भूमिका चंद्रा और छत्तापल चंद्रा के साथ मिलकर संदेश भेजने, धमकाने और रुपये व सोना वसूलने की साजिश रची।
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सह-आरोपितों को जमानत मिलने की दलील
छत्तापल चंद्रा की ओर से हाई कोर्ट में कहा गया था कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। यह भी दलील दी गई कि सह-आरोपित जानकी सिदार और भूमिका चंद्रा को नियमित जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर उन्हें भी अग्रिम जमानत दी जाए।
राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए आरोपों को गंभीर बताया था। सरकार का कहना था कि जांच जारी है और पूछताछ के लिए आरोपित को हिरासत में लेने की जरूरत पड़ सकती है।
हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने 31 अगस्त को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोप गंभीर हैं, जांच जारी है और सह-आरोपित महिलाओं को मिली जमानत के आधार पर छत्तापल चंद्रा समान राहत का दावा नहीं कर सकते। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
पांच अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने मामले के अभिलेखों पर विचार करने के बाद कहा कि अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं बनता। इसके साथ ही विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई। आरोपों की सत्यता पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।