• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 14, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

CG High Court ने पिता को नहीं दी कस्टडी, कहा- मामा के साथ रहना ही बच्चे के लिए सबसे अच्छा, दोनों जुड़ चुके हैं

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक घरेलू विवाद के मामले में फैसला देते हुए बच्चे की कस्टडी मामा को दे दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बच्चा अपने मामा के ...और पढ़ें

By Roman TiwariEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Thu, 14 Aug 2025 10:48:39 AM (IST)Updated Date: Thu, 14 Aug 2025 10:49:09 AM (IST)
CG High Court ने पिता को नहीं दी कस्टडी, कहा- मामा के साथ रहना ही बच्चे के लिए सबसे अच्छा, दोनों जुड़ चुके हैं
मां की मौत के बाद जन्म से मामा के पास रह रहा बच्चा, पिता को नहीं मिली कस्टडी

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी को लेकर दिया फैसला
  2. कोर्ट ने कहा- मामा के साथ ही बच्चे का सवोत्तम हित
  3. जन्म के बाद ही मां की मौत, तब से मामा के साथ बच्चा

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम पारिवारिक विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए नाबालिग बच्चे की स्थायी कस्टडी उसके मामा के पास बनाए रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे का "सर्वोत्तम हित" और उसका मानसिक व भावनात्मक कल्याण ही सबसे महत्वपूर्ण है। साथ ही, बच्चे के पिता को नियमित मिलने और छुट्टियों में साथ समय बिताने का अधिकार भी दिया गया है।

यह है मामला

दुर्ग निवासी तरण सिंह की शादी रागिनी सिंह से हुई थी। शादी के बाद 14 फरवरी 2017 को बेटा पुरुषोत्तम सिंह पैदा हुआ, लेकिन 12 मार्च 2017 को पत्नी की मौत हो गई। इसके बाद से बच्चा अपने मामा, कबीरधाम निवासी ललित किशोर बैस के पास रह रहा है। ललित किशोर ने फैमिली कोर्ट में अर्जी देकर कहा कि जन्म से ही बच्चा उनके पास है, पिता ने कभी उसे वापस लेने की कोशिश नहीं की और दूसरी शादी कर ली। इसलिए उसकी देखभाल और पालन-पोषण का अधिकार उन्हें दिया जाए।


दूसरी ओर पिता तरण सिंह ने दावा किया कि वह बच्चे के प्राकृतिक अभिभावक हैं और उसके भविष्य के लिए बेहतर शिक्षा और देखभाल दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार में ऐसे लोग हैं जो बच्चे की सही देखभाल कर सकते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का दिया हवाला

कोर्ट ने नील रतन कुंडू बनाम अभिजीत कुंडू, मौसमी मोईत्रा गांगुली बनाम जयंत गांगुली और हालिया शाजिया अमन खान मामले के सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि, बच्चा न तो कोई संपत्ति है, न गेंद कि जिसे एक से दूसरे के पास उछाला जाए। बच्चे के कल्याण और भलाई को ही सर्वोपरि माना जाएगा, न कि सिर्फ माता-पिता के अधिकारों को।

हाई कोर्ट ने यह दिया आदेश

हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए मामा के पास ही बच्चे की कस्टडी रहने का आदेश दिया, लेकिन पिता को विजिटेशन और कान्टैक्ट राइट्स दिए। l वीडियो काल/फोन पर बातचीत -हर शनिवार या रविवार एक घंटे की बातचीत का अधिकार। l लंबी छुट्टियों में मुलाकात- 2 सप्ताह से ज्यादा की छुट्टियों में 5-10 दिन बच्चा पिता के साथ रह सकेगा। l त्योहारों पर साथ समय बिताना- पिता त्योहार के दिन बच्चे के पास या किसी उपयुक्त स्थान पर समय बिता सकेंगे। l कोर्ट ने कहा कि मामा को पिता और बच्चे की मुलाकात में कोई बाधा नहीं डालनी होगी।

फैमिली कोर्ट ने मामा के पक्ष में दिया था निर्णय

फैमिली कोर्ट कबीरधाम ने सभी साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर ललित किशोर (मामा) को ही बच्चे का संरक्षक नियुक्त कर दिया। पिता ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

यह भी पढ़ें:CG Dog Bite: बिलासपुर में आवारा कुत्तों का आतंक... 4 साल में 50 हजार लोगों को बनाया शिकार

मामा और बच्चा भावनात्मक रूप से जुड़ चुके हैं-हाई कोर्ट

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच जस्टिस राजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। कोर्ट ने पाया कि पिता ने पत्नी की मौत के एक साल के भीतर दूसरी शादी कर ली और दूसरी पत्नी से एक बेटी भी है। जन्म से ही बच्चा मामा के पास रह रहा है और पिता ने कभी सामाजिक या कानूनी प्रयास कर कस्टडी लेने की कोशिश नहीं की। मामा और बच्चा मानसिक रूप से जुड़ चुके हैं, ऐसे में अचानक उसे अलग करना उसके भावनात्मक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।