CGPSC घोटाला: पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की जमानत पर फैसला सुरक्षित, 45 लाख की रिश्वत का है गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के बहुचर्चित भर्ती घोटाले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की जमानत याचिका पर हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित र...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 10:13:26 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 10:13:26 PM (IST)
हाई कोर्टHighLights
- CGPSC पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की जमानत सुरक्षित।
- डिप्टी कलेक्टर चयन के लिए 45 लाख रिश्वत का आरोप।
- सीबीआई जांच में प्रश्नपत्र लीक और पद के दुरुपयोग का खुलासा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में बचाव पक्ष और सीबीआई (CBI) की ओर से लंबी बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय आदेश के लिए सुरक्षित रखा है। यह पूरा मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पद के दुरुपयोग, रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों से जुड़ा है।
45 लाख रुपये की रिश्वत का आरोप
सीबीआई की जांच के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया में प्रभाव का इस्तेमाल कर पसंदीदा अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया। बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्रवण कुमार गोयल ने अपने बेटे और बहू को डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित कराने के लिए कथित तौर पर 45 लाख रुपये की रिश्वत दी थी।
आरोप है कि यह रकम ग्रामीण विकास समिति के माध्यम से दो किस्तों में दी गई थी, जिससे सोनवानी के परिजन जुड़े हुए थे। इसी मामले में सीबीआई ने 18 नवंबर 2024 को सोनवानी और उद्योगपति श्रवण गोयल को गिरफ्तार किया था।
पेपर लीक और नियमों में फेरबदल की साजिश
सीबीआई की चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया है कि CGPSC-2021 की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र कुछ अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले ही पहुंचा दिए गए थे। सोनवानी पर अपने भतीजों और कारोबारी के परिजनों को डिप्टी कलेक्टर व डीएसपी जैसे पदों पर चयन कराने का आरोप है।
इसके अलावा आयोग के नियमों में फेरबदल करने की बात भी सामने आई है। नवंबर 2024 से जेल में बंद सोनवानी की जमानत पर अब हाईकोर्ट के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं।