छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संविदा महिला डॉक्टर को 180 दिन का मातृत्व अवकाश देने का दिया आदेश, सेवा समाप्ति नोटिस निरस्त
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा के शासकीय मेडिकल कॉलेज में संविदा सहायक प्राध्यापक डॉ. निकिता श्रीवास्तव को 180 दिन का सवैतनिक मातृत्व अवकाश और सभी लाभ दे...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 09:33:34 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 09:33:34 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- संविदा महिला डॉक्टर को 180 दिन के मातृत्व अवकाश का आदेश।
- हाईकोर्ट ने सेवा समाप्ति नोटिस और एकल पीठ का आदेश निरस्त किया।
- गर्भावस्था में अवकाश मांगने पर दिया था सेवा समाप्ति नोटिस।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कोरबा के शासकीय मेडिकल कॉलेज में संविदा सहायक प्राध्यापक डॉ. निकिता श्रीवास्तव को 180 दिन का मातृत्व अवकाश और नियमानुसार सभी लाभ देने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ ने कहा कि संविदा सेवा जारी रहने के दौरान आवेदन करने पर केवल नियमित डाक्टर की नियुक्ति के आधार पर मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं किया जा सकता।
पीठ ने 14 अक्टूबर को दिए फैसले में एकल पीठ का आठ सितंबर 2026 का आदेश और कालेज प्रबंधन का छह अगस्त 2026 का सेवा समाप्ति नोटिस निरस्त कर दिया। निकिता की नियुक्ति 16 नवंबर 2022 को स्वर्गीय बिसाहू दास महंत स्मृति शासकीय मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में हुई थी।
नियमित नियुक्त डा. शीला वर्मा ने 25 जून 2026 को पदभार संभाला, लेकिन निकिता संविदा पर काम करती रहीं। उन्होंने 31 जुलाई 2026 को एक अगस्त 2026 से 28 जनवरी 2027 तक 180 दिन के सवैतनिक मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया। विभागाध्यक्ष ने तीन अगस्त को इसकी अनुशंसा की, लेकिन छह अगस्त को उन्हें एक महीने का सेवा समाप्ति नोटिस दे दिया गया।
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देने होंगे सभी लाभ
निकिता के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के डा. कविता यादव बनाम सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय मामले का हवाला देते हुए कहा कि संविदा अवधि से आगे जाने पर भी मातृत्व लाभ का अधिकार समाप्त नहीं होता। राज्य सरकार ने दलील दी कि नियमित डाक्टर के पदभार संभालते ही संविदा नियुक्ति की शर्तों के अनुसार सेवा समाप्त हो गई थी।
हाई कोर्ट ने पाया कि आवेदन के समय निकिता सेवा में थीं। पीठ ने उन्हें आवेदन की तारीख से 180 दिन का अवकाश और मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के तहत सभी लाभ देने का निर्देश दिया।