
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त सहायक शिक्षक से 15 साल से अधिक पुरानी वेतन निर्धारण की गलती के आधार पर 3,72,824 रुपये की वसूली का आदेश निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता तृतीय श्रेणी कर्मचारी थीं और रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने अधिक वेतन पाने के लिए कोई धोखाधड़ी या गलत जानकारी दी।
यदि अतिरिक्त भुगतान विभाग द्वारा की गई वेतन निर्धारण की गलती से हुआ है, तो सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह फैसले में निर्धारित परिस्थितियों में कर्मचारी से वसूली नहीं की जा सकती।जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने सुधा वर्मा विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन व अन्य मामले में यह आदेश दिया।
कोर्ट ने रिकवरी आदेश रद्द करने के साथ विभाग को याचिकाकर्ता से संबंधित वेतन निर्धारण की नए सिरे से जांच करने की स्वतंत्रता दी है, लेकिन इसके लिए पहले उन्हें पर्याप्त सुनवाई का अवसर देना होगा। साथ ही रोकी या वसूल की गई राशि, यदि कोई हो, वापस करने का निर्देश दिया गया है।
याचिकाकर्ता गोड़पारा बिलासपुर निवासी सुधा वर्मा, पति राजेश कुमार वर्मा, उम्र 63 वर्ष, सेवानिवृत्त सहायक शिक्षक हैं। उन्होंने बिल्हा के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी 17 जून 2025 के रिकवरी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
यह भी पढ़ें- कलेक्टर से आईजी तक लगाई गुहार, पोते और PNB मैनेजर ने हड़पी 7.25 लाख की कमाई, सड़कों पर बुजुर्ग
सुको का आदेश बना आधार
राज्य की ओर से कहा गया कि वेतन निर्धारण के समय क्लेरिकल गलती के कारण याचिकाकर्ता का वेतन अधिक निर्धारित हो गया था। हालांकि, राज्य ने यह नहीं बताया कि अधिक भुगतान हासिल करने में याचिकाकर्ता की ओर से किसी धोखाधड़ी या गलत प्रस्तुतीकरण की भूमिका थी।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले से किए गए अतिरिक्त भुगतान की वसूली का सवाल सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह में निर्धारित कानून के अनुसार ही तय होगा।