नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। बिलासपुर के एक एनडीपीएस मामले में हाई कोर्ट ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने डीजीपी को यह बताने का निर्देश दिया है कि जिस पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज कराई और जिसके आधार पर एफआईआर हुई, उसी अधिकारी को मामले की जांच करने और चार्जशीट पेश करने की अनुमति कैसे दी गई।
मामला बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में 2925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) गोलियों की कथित बरामदगी से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यह मामला पारिवारिक विवाद के चलते महिला को फंसाने के लिए साजिश के तहत बनाया गया है। कोर्ट ने मामले में संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी करते हुए उसे अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से उपस्थित होने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को होगी।
छत पर पतंग उड़ाते समय 14 वर्षीय बच्चे को मिला था बैग
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि कथित प्रतिबंधित दवाओं वाला पॉलीथिन बैग महिला को सीधे नहीं मिला था। करीब 14 वर्ष के एक नाबालिग बच्चे को पतंग उड़ाते समय यह बैग घर की छत पर मिला था। बच्चे ने दवाओं के बारे में मोबाइल पर जानकारी जुटाने के बाद अपनी मां को बताया। परिवार का कहना है कि बैग को अनचाही वस्तु समझकर सीढ़ियों के पास कचरे के स्थान पर रख दिया गया था।
पुलिस ने 15 फरवरी 2026 की सुबह करीब 7:35 बजे घर में तलाशी ली। छत पर कुछ नहीं मिलने के बाद सीढ़ियों के पास रखे उक्त बैग को बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार इसमें 2925 क्लोनाजेपाम/रिवोट्रिल टैबलेट, जिनका वजन करीब 438.750 ग्राम था, मिलीं। महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(सी)
और 22 के तहत मामला दर्ज किया गया और आरोप पत्र भी पेश हो चुका है।
पति से लंबे समय से चल रहा है वैवाहिक विवाद
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि महिला का पति एक मेडिकल दुकान चलाता है और दोनों के बीच लंबे समय से वैवाहिक विवाद चल रहा है। भरण-पोषण, उसकी वसूली, बच्चों की कस्टडी और तलाक सहित कई मामले पहले से चल रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में दवाओं को महिला के घर में प्लांट कर झूठा फंसाने की आशंका जताई गई है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि महिला के पति और उसके एक रिश्तेदार की कथित छापे से ठीक पहले सरकंडा थाने में मौजूदगी भी जांच का विषय है।
बच्चे को करीब दस घंटे थाने में रखने का आरोप
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि करीब 14 वर्षीय बच्चे के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं होने के बावजूद उसे पुलिस थाने ले जाकर लगभग दस घंटे तक रखा गया। बच्चे ने लगातार पुलिस को बताया कि बैग उसे छत पर मिला था और उसने ही उसे बाद में सीढ़ियों के पास रखा था।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि दवाओं के स्रोत, बैग को छत पर रखने वाले व्यक्ति, संबंधित लोगों की भूमिका और महिला की गिरफ्तारी की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने बच्चे का मोबाइल भी फोरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध कराने की बात कही है।
डीजीपी से दो अहम सवाल
हाई कोर्ट ने डीजीपी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर मुख्य रूप से यह स्पष्ट करने कहा है कि शैलेंद्र सिंह, जिसने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज कराई और जिसके आधार पर एफआईआर हुई, उसे ही मामले की जांच करने की अनुमति कैसे दी गई?
इस अधिकारी ने आगे जांच पूरी कर महिला के खिलाफ चार्जशीट कैसे पेश कर दी?
कोर्ट ने डीजीपी को शैलेंद्र सिंह के पिछले आचरण के संबंध में भी व्यक्तिगत हलफनामा देने का निर्देश दिया है।
24 अगस्त को अगली सुनवाई
कोर्ट ने संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी करते हुए नोटिस की तामील वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के माध्यम से कराने का निर्देश दिया है। उन्हें अगली सुनवाई में स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।
महत्वपूर्ण: हाई कोर्ट ने इस स्तर पर महिला के खिलाफ आरोपों को सही या गलत घोषित नहीं किया है। कोर्ट ने फिलहाल पुलिस जांच की प्रक्रिया और कथित हितों के टकराव से जुड़े सवालों पर जवाब मांगा है।