• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला: पुरानी प्रतीक्षा सूची से नई नियुक्तियां अवैध: भृत्य और शिक्षिका की बर्खास्तगी बरकरार

हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: भर्ती प्रक्रिया खत्म होने के बाद नए पदों पर पुरानी प्रतीक्षा सूची से नियुक्तियां अवैध

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 09 Jul 2026 10:01:36 AM (IST)Updated Date: Thu, 09 Jul 2026 10:01:36 AM (IST)
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला: पुरानी प्रतीक्षा सूची से नई नियुक्तियां अवैध: भृत्य और शिक्षिका की बर्खास्तगी बरकरार

HighLights

  1. सालों की नौकरी के बाद भी बरकरार रहेगी बर्खास्तगी
  2. बलरामपुर के आदिम जाति कल्याण विभाग में हुई थी गड़बड़ी
  3. पिछले दरवाजे से मिली नौकरी कभी भी हो सकती है खत्म

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: हाई कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में पुरानी प्रतीक्षा सूची के दुरुपयोग पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि भर्ती प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सृजित नए पदों पर पुरानी चयन सूची से नियुक्तियां देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल के डिवीजन बेंच ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के मिडिल स्कूल में कार्यरत भृत्य अखिलेश और शिक्षिका सुषमा ठाकुर की रिट अपीलें खारिज करते हुए उनकी बर्खास्तगी को वैध ठहराया।

डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की गलती या लंबी सेवा के आधार पर अवैध नियुक्तियों को वैध नहीं बनाया जा सकता। मामले में आदिम जाति कल्याण विभाग ने 2012 में भृत्य और सहायक ग्रेड-3 के पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था।


चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ अतिरिक्त पदों के लिए पुरानी प्रतीक्षा सूची से नियुक्तियां दी गईं, जो अवैध थीं। अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भविष्य में सृजित पदों को पुरानी प्रतीक्षा सूची से भरना न केवल भर्ती नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उन युवाओं के अधिकारों का भी हनन है जो बाद में पात्र हुए। हाई कोर्ट ने तीन महत्वपूर्ण नियमों को दोहराया, जिसमें नियुक्ति केवल विज्ञापित पदों तक सीमित होना, बैकडोर नियुक्तियों का संविधान के खिलाफ होना और लंबी सेवा से अवैध नियुक्तियों का वैध न होना शामिल है।

यह भी पढ़ें- अनुकंपा नियुक्ति, हाई कोर्ट ने पूछा- कर्मचारी की मौत के एक महीने के भीतर आश्रित को आवेदन फार्म क्यों नहीं दिया?