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अनुकंपा नियुक्ति, हाई कोर्ट ने पूछा- कर्मचारी की मौत के एक महीने के भीतर आश्रित को आवेदन फार्म क्यों नहीं दिया?

अनुकंपा नियुक्ति पर राज्य सरकार से एक सप्ताह में मांगा जवाब, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति के एक ...और पढ़ें

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 01:36:55 PM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 01:36:55 PM (IST)
अनुकंपा नियुक्ति,  हाई कोर्ट ने पूछा- कर्मचारी की मौत के एक महीने के भीतर आश्रित को आवेदन फार्म क्यों नहीं दिया?

HighLights

  1. अनुकंपा नियुक्ति नीति के उल्लंघन पर हाई कोर्ट सख्त
  2. राज्य सरकार से एक सप्ताह में मांगा जवाब
  3. आश्रित को एक महीने में फॉर्म देना विभाग का काम

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के एक मामले में राज्य सरकार और संबंधित विभाग से कड़ा जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि शासन की अनुकंपा नियुक्ति नीति के स्पष्ट प्रावधान के बावजूद मृत शासकीय कर्मचारी के आश्रित को एक महीने के भीतर आवेदन फार्म क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया। हाई कोर्ट ने इस संबंध में प्रतिवादियों को एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण और संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।

यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने विनोद कुमार डोमर उर्फ विनोद कुमार मांझरे की ओर से दायर रिट याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता के पिता शासकीय सेवा में कार्यरत थे और सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि कर्मचारी की मृत्यु के तीन महीने के भीतर आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि निर्धारित समयसीमा का पालन आवश्यक था।


इसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी क्रमांक-3 और 4 की ओर से अधिवक्ता पंकज अग्रवाल ने तर्क दिया कि आवेदन निर्धारित समय के भीतर प्राप्त नहीं होने के कारण उसे अस्वीकार किया गया। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रवींद्र शर्मा ने 14 जून 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति की कंडिका 15(1) का हवाला देते हुए कहा कि किसी शासकीय सेवक की मृत्यु होने पर संबंधित विभाग का दायित्व है कि वह एक महीने के भीतर मृतक कर्मचारी के आश्रित परिवार को स्वयं अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन का प्रपत्र उपलब्ध कराए। यदि विभाग ने यह वैधानिक जिम्मेदारी पूरी ही नहीं की, तो आवेदन में हुई देरी का ठीकरा आश्रित पर नहीं फोड़ा जा सकता।

हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रतिवादियों द्वारा दाखिल जवाब में इस बात का कोई उल्लेख नहीं है कि नीति के अनुरूप मृतक कर्मचारी के आश्रित को एक महीने के भीतर आवेदन फॉर्म उपलब्ध कराया गया था या नहीं। इस पर न्यायालय ने प्रतिवादियों को एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण और संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई अगले से अगले सप्ताह निर्धारित की गई है। मामले में राज्य शासन की ओर से पैनल अधिवक्ता अमनदीप सिंह ने पक्ष रखा।

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