छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त कार्रवाई, केंद्रीय विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में होना होगा पेश
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद दिवंगत कर्...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 10:58:27 AM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 10:58:27 AM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- कर्मचारी के हक पर लापरवाही पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख।
- नियमित वेतन के एरियर्स की जानकारी छिपाना पड़ा भारी।
- केंद्रीय विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को 2 सितंबर को होना होगा पेश।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी को नियमितीकरण के बाद मिलने वाले वेतन और अन्य लाभों के मामले में हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद कर्मचारी के नियमित वेतन के बकाया (एरियर्स) का पूरा विवरण शपथपत्र में नहीं देने पर कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया आदेश की अवहेलना का प्रयास माना है।
हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अश्विनी कुमार दीक्षित को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने सुनवाई करते हुए रजिस्ट्रार को 2 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने कहा है।
केवल सेवानिवृत्ति लाभ का विवरण दिया
इस अवमानना प्रकरण में पिछली सुनवाई 14 जुलाई 2026 को हुई थी। तब कोर्ट ने प्रतिवादी नंबर दो डॉ. अश्विनी दीक्षित को दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया था कि वर्ष 2010 की रिट याचिका में याचिकाकर्ता रहे दिवंगत धन्नू पांडेय को कौन-कौन से लाभ पाने की पात्रता है।
विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि 31 जुलाई 2026 को दाखिल शपथपत्र में कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभों का विवरण दे दिया गया है। हालांकि कोर्ट ने पुराने आदेश को देखने के बाद पाया कि निर्देश केवल सेवानिवृत्ति लाभ तक सीमित नहीं था।
नियमित वेतन के एरियर्स का नहीं किया खुलासा
कोर्ट ने कहा कि 26 अगस्त 2008 को दिए गए आदेश में कर्मचारियों को उनकी सेवाओं के नियमितीकरण की तारीख से नियमित कर्मचारियों के रूप में सभी लाभ देने की बात कही गई थी। इसके बावजूद दाखिल शपथपत्र में नियमित वेतन के एरियर्स का विवरण नहीं दिया गया।
हाई कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की पूरी पात्रता का खुलासा नहीं किया जाना प्रथम दृष्टया प्रतिवादियों अवमाननाकर्ताओं की ओर से कोर्ट के आदेश की अवहेलना का प्रयास प्रतीत होता है।
2 सितंबर को व्यक्तिगत उपस्थिति
कोर्ट ने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर के रजिस्ट्रार डॉ. अश्विनी कुमार दीक्षित को 2 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने कहा है कि 14 जुलाई के स्पष्ट निर्देश के बावजूद कर्मचारी की पूरी पात्रता का विवरण शपथपत्र में क्यों नहीं दिया गया।
साथ ही प्रतिवादी नंबर एक की ओर से नया शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इसमें कर्मचारी को नियमितीकरण की तारीख से मिलने वाले नियमित वेतन और उसके एरियर्स का पूरा विवरण देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।