
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कर्मचारी को मिलने वाले ट्रैवलिंग, मोबाइल और इंटरनेट अलाउंस को मुआवजा निर्धारण के लिए उसकी आय से अलग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इन भत्तों को मृतक की मासिक आय में जोड़ते हुए उसके परिवार को मिलने वाला मुआवजा 55 लाख 26 हजार 340 रुपये से बढ़ाकर 64 लाख 39 हजार 60 रुपये कर दिया है। इस निर्णय से स्वजन को नौ लाख 12 हजार 720 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे, जिस पर दावा आवेदन की तारीख से भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मिलेगा।
यह आदेश जस्टिस संजय के अग्रवाल ने याचिकाकर्ता और बीमा कंपनी की याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पारित किया। दोनों अपीलें एक ही दुर्घटना और मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, बस्तर-जगदलपुर के 28 फरवरी 2019 के आदेश से संबंधित थीं। मृतक ई.के. विनायक साइनोक्लसी टेक्नोलाजीज प्राइवेट लिमिटेड में मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में एनएमडीसी नगरनार में कार्यरत थे। 18 दिसंबर 2017 को उनकी मौत हो गई थी।
स्वजन ने उनकी मासिक आय 35 हजार रुपये बताते हुए मुआवजे की मांग की थी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने आय की गणना करते समय 3,200 रुपये ट्रैवलिंग अलाउंस, 700 रुपये मोबाइल अलाउंस और 500 रुपये इंटरनेट अलाउंस को घटाकर मासिक आय 26,800 रुपये मानी थी। स्वजन ने हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि ये सभी भत्ते कर्मचारी की आय का हिस्सा हैं।
यह भी पढ़ें- झूठे दहेज केस, अलग रहने की जिद और अनुचित बातचीत मानसिक क्रूरता, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना आधार
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के मीनाक्षी बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि परिवहन, मकान किराया और विशेष जैसे विभिन्न भत्तों को आय निर्धारित करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मृतक की मासिक आय में 3,200 रुपये ट्रैवलिंग, 700 रुपये मोबाइल और 500 रुपये इंटरनेट अलाउंस जोड़ने पर आय 31,200 रुपये होती है।
संभावित आय का गणित फेल
बीमा कंपनी ने मुआवजा घटाने की मांग करते हुए कहा था कि मृतक स्थायी कर्मचारी नहीं था, इसलिए भविष्य की संभावित आय के लिए 50 प्रतिशत की वृद्धि के बजाय 40 प्रतिशत वृद्धि होनी चाहिए। हाई कोर्ट ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने ऐसे तय की भुगतान राशि
कोर्ट ने आयकर की कटौती के बाद वार्षिक आय 3,68,180 रुपये मानी। इसमें 50 प्रतिशत भविष्य संभावनाएं जोड़ने के बाद राशि 5,52,270 रुपये हुई। एक-तिहाई व्यक्तिगत खर्च घटाने के बाद 3,68,180 रुपये की राशि पर 17 का मल्टीप्लायर लगाया गया। इसके अलावा लास आफ एस्टेट के लिए 18 हजार, अंतिम संस्कार के लिए 18 हजार, पत्नी को स्पाउसल कंसोर्टियम के लिए 48 हजार और माता-पिता को पैरेंटल कंसोर्टियम के लिए कुल 96 हजार रुपये जोड़े गए। इस तरह कुल मुआवजा 64,39,060 रुपये निर्धारित किया गया। बीमा कंपनी की अपील को खारिज कर दिया गया।