झूठे दहेज केस, अलग रहने की जिद और अनुचित बातचीत मानसिक क्रूरता, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पत्नी द्वारा झूठा दहेज केस दर्ज कराने, वृद्ध मां से अलग रहने की जिद करने और अनुचित बातचीत को मानसिक क्रूरता मानते हुए पति विवेक...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 02 Sep 2026 05:20:26 PM (IST)Updated Date: Wed, 02 Sep 2026 05:20:26 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- लंबे समय के पारिवारिक विवादों पर हाई कोर्ट की टिप्पणी।
- वैवाहिक विवाद से जुड़ा बेहद अहम मामला।
- अदालत ने समाप्त किया विवाह संबंध।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण वैवाहिक विवाद में पत्नी के आचरण को मानसिक क्रूरता मानते हुए पति विवेक अग्रवाल को तलाक की मंजूरी दे दी। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि पति-पत्नी के लंबे समय के व्यवहार और विवादों को समग्र रूप से देखना आवश्यक है। पत्नी द्वारा पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराने के बाद पति को बरी होना भी एक महत्वपूर्ण तथ्य था।
कोर्ट ने 18 फरवरी 2025 के जिला न्यायाधीश के फैसले को निरस्त करते हुए 12 दिसंबर 2014 को हुई शादी को समाप्त करने का आदेश दिया। विवेक और सरिता अग्रवाल की शादी के बाद 2015 में एक पुत्र का जन्म हुआ। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी छोटी-छोटी बातों पर विवाद करती थी और वृद्ध मां से अलग रहने का दबाव डालती थी। पत्नी बार-बार मायके चली जाती थी और अलग रहने की मांग करती थी।
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रिकार्डिंग ने किया साबित
कोर्ट ने पत्नी की मां के बयान को भी ध्यान में रखा, जिसमें उन्होंने बातचीत की रिकार्डिंग सुनने की बात स्वीकार की। हाई कोर्ट ने कहा कि झूठे आरोपों का पति के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे मानसिक क्रूरता स्थापित होती है।
कोर्ट ने यह दिया आदेश
अलग घर की मांग को भी परिस्थितियों के आधार पर परखा गया। कोर्ट ने कहा कि पति की मां वृद्ध और बीमार थी, इसलिए पति का अपनी मां के साथ रहने का निर्णय उचित था। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद और पत्नी के अनुचित संवाद को देखते हुए कोर्ट ने पति के पक्ष में निर्णय दिया। मामले में खर्च के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया।