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महिला ओबीसी कोटे की 12 सीटों पर पुरुषों की नियुक्ति, याचिकाकर्ता को तीन लाख मुआवजा

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नगर निकायों में ओबीसी महिला कोटे की 12 सीटों पर पुरुष अभ्यर्थियों की नियुक्ति को नियमों के विपरीत माना है। हालांकि 12 साल बीत ज...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 02 Sep 2026 03:28:35 PM (IST)Updated Date: Wed, 02 Sep 2026 03:28:35 PM (IST)
महिला ओबीसी कोटे की 12 सीटों पर पुरुषों की नियुक्ति, याचिकाकर्ता को तीन लाख मुआवजा

HighLights

  1. वर्ष 2013 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा मामला।
  2. याचिकाकर्ता नम्रता देवांगन को बड़ी राहत।
  3. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया फैसला।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: हाई कोर्ट ने नगर निकायों में सहायक शिक्षक (शिक्षा कर्मी ग्रेड-3) की भर्ती से जुड़े मामले में महिला ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित 12 पदों पर पुरुष अभ्यर्थियों की नियुक्ति को आरक्षण नियमों के विपरीत माना।

हालांकि, नियुक्ति आदेश 2014 का होने और 12 वर्ष बीत जाने के कारण हाई कोर्ट ने इन नियुक्तियों को रद्द नहीं किया। याचिकाकर्ता को हुई क्षति के लिए रायपुर नगर निगम को तीन लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। यह आदेश जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने नम्रता देवांगन की याचिका पर सुनाया।

याचिकाकर्ता ने 2013 में सहायक शिक्षक, विज्ञान विषय के पद के लिए आवेदन किया था। 204 पदों में से 12 ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित थे। याचिकाकर्ता ने 60.70 अंक प्राप्त किए और मेरिट सूची में उसका स्थान 1594 था।


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याचिकाकर्ता का आरोप था कि आरक्षित पदों पर पुरुष अभ्यर्थियों को नियुक्त किया गया। कोर्ट ने कहा कि 2013 के शिक्षक भर्ती नियमों के तहत महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान था। सरकारी सर्कुलर वैधानिक नियमों को अधिरोहित नहीं कर सकता। कोर्ट ने भविष्य की भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए।