
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अरपा नदी में शहर का सीवेज जाने के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अब सीधे यह जानकारी मांगी है कि बिलासपुर नगर निगम सीमा के सभी 70 नाले क्या छह सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जुड़े हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि इन सभी नालों से निकलने वाले सीवेज को अरपा नदी में पहुंचने से पहले प्रभावी रूप से रोका (इंटरसेप्ट), डायवर्ट और ट्रीट किया जा रहा है या नहीं। ]
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने राज्य सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को इन बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी देते हुए नया शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।
शहर में रोज निकल रहा 72.20 एमएलडी सीवेज
31 अगस्त को हुई सुनवाई में पेश शपथपत्र के अनुसार बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की वर्ष 2026 में अनुमानित आबादी 6,68,540 है। शहर में प्रतिदिन करीब 72.20 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है। यह सीवेज सीवेज नेटवर्क और 70 नालों के माध्यम से बहता है। इनमें अरपा नदी के उत्तरी हिस्से में 35 और दक्षिणी हिस्से में 35 नाले हैं। उत्तरी हिस्से में पांच और दक्षिणी हिस्से में छह प्रमुख नाले शामिल हैं।
चार एसटीपी चालू, क्षमता 78 एमएलडी
नगर निगम के अनुसार वर्तमान में चार एसटीपी संचालित हैं। चिल्हाटी एसटीपी की क्षमता 17 एमएलडी, दोमुहानी की 54 एमएलडी, कोनी-सी की छह एमएलडी और पचरिघाट की एक एमएलडी है। इनकी कुल क्षमता 78 एमएलडी है। हालांकि जुलाई 2026 तक इन एसटीपी का वास्तविक उपयोग करीब 43.90 एमएलडी ही हो रहा था। यानी शहर में प्रतिदिन पैदा होने वाले 72.20 एमएलडी सीवेज की तुलना में करीब 28.30 एमएलडी सीवेज के उपचार का अंतर बना हुआ है।
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मंगल में दो नए एसटीपी निर्माणाधीन
सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने के लिए मंगल-बी में 10 एमएलडी क्षमता का एसटीपी निर्माणाधीन है। जुलाई 2026 तक इसका करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। शेष इलेक्ट्रोमैकेनिकल कार्य 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है।
वहीं मंगल-डी में छह एमएलडी क्षमता के एसटीपी का सिविल और इलेक्ट्रोमैकेनिकल काम पूरा हो चुका है तथा ट्रायल रन चल रहा है। दोनों निर्माणाधीन एसटीपी की कुल क्षमता 16 एमएलडी है।
दोनों एसटीपी चालू हुए तो क्षमता 94 एमएलडी
शपथपत्र के मुताबिक दोनों नए एसटीपी चालू होने के बाद नगर निगम क्षेत्र की कुल सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़कर 94 एमएलडी हो जाएगी। यह वर्तमान में उत्पन्न हो रहे 72.20 एमएलडी सीवेज से अधिक होगी। इसके अलावा एक और एसटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग के पास तकनीकी व्यवहार्यता और उपयोगिता की जांच के लिए विचाराधीन है। नगर निगम ने मौजूदा एसटीपी की कम उपयोग हो रही क्षमता बढ़ाने और शहर में उत्पन्न होने वाले पूरे सीवेज का उपचार सुनिश्चित करने की योजना बनाने की बात भी कही है।
कोर्ट ने छह बिंदुओं पर मांगी स्पष्ट जानकारी
हाई कोर्ट ने सरकार से नए शपथपत्र में विशेष रूप से यह बताने को कहा है कि
5 अक्टूबर को फिर होगी निगरानी
हाई कोर्ट ने मामले की निगरानी जारी रखते हुए सरकार को इन सवालों पर स्पष्ट स्थिति बताने का निर्देश दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। कोर्ट के निर्देश से स्पष्ट है कि केवल एसटीपी की कुल क्षमता बताना पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करना होगा कि शहर के प्रत्येक नाले से निकलने वाला सीवेज वास्तव में उपचार संयंत्र तक पहुंच रहा है और अरपा नदी में बिना उपचार के नहीं जा रहा है।