CGPSC की मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं दोबारा जांचने की मांग खारिज, हाई कोर्ट ने कहा- नियमों में पुनर्मूल्यांकन का प्रविधान नहीं
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के चयन को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 01:47:34 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 01:48:57 PM (IST)
HighLights
- आयोग के नियमों में पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं
- 608 अभ्यर्थी ही न्यूनतम अर्हता अंक हासिल कर सके
- मुख्य परीक्षा का परिणाम 31 अगस्त 2026 को जारी हुआ
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के चयन को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं हाई कोर्ट ने खारिज कर दी हैं।
याचिकाकर्ता निखिलेश सोनी, नीरज कुमार व अन्य ने उत्तरपुस्तिकाओं की दोबारा जांच के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने और पूरी चयन प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की थी।
आयोग के नियमों में पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं
जस्टिस विभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आयोग के नियमों में पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है। ऐसे में अदालत विशेषज्ञों की भूमिका नहीं निभा सकती। पीएससी की ओर से अधिवक्ता सुदीप अग्रवाल ने बताया कि लोग सेवा आयोग ने 265 पदों पर भर्ती के लिए 26 नवंबर 2025 को विज्ञापन जारी किया था।
608 अभ्यर्थी ही निर्धारित न्यूनतम अर्हता अंक हासिल कर सके
मुख्य परीक्षा का परिणाम 31 अगस्त 2026 को जारी हुआ। आयोग के अनुसार कुल 608 अभ्यर्थी ही निर्धारित न्यूनतम अर्हता अंक हासिल कर सके। इन्हीं को साक्षात्कार के लिए पात्र माना गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पदों की संख्या के मुकाबले तीन गुना अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था।
आयोग ने जवाब में बताया कि नियमों के अनुसार अनारक्षित वर्ग के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 23 प्रतिशत अंक जरूरी थे। इतने अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या ही 608 रही।
अदालत ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि न्यूनतम अर्हता अंक हासिल करने वाले किसी अभ्यर्थी को साक्षात्कार से बाहर रखा गया। इसलिए केवल 1:3 अनुपात पूरा नहीं होने के आधार पर चयन प्रक्रिया को गलत नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विकेश कुमार गुप्ता बनाम राजस्थान राज्य और रण विजय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती नियमों में प्रविधान नहीं होने पर उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का आदेश नहीं दिया जा सकता।