
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। रायगढ़ जिले में भूमि अधिग्रहण के बदले रोजगार की मांग को लेकर दायर समीक्षा याचिका छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम बुंदेली, पोस्ट बंडोरा, मालखरौदा निवासी देव प्रसाद वर्मा ने 19 अगस्त 2025 के उस आदेश को वापस लेने या संशोधित करने की मांग की थी, जिसमें उनकी रोजगार संबंधी याचिका खारिज कर दी गई थी।
हाई कोर्ट ने कहा कि समीक्षा में उठाए गए आधार मूल याचिका में रखे ही नहीं गए थे और अधिग्रहण के समय लागू नीति के तहत दामाद के लिए नौकरी का दावा भी मान्य नहीं था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने 30 सितंबर 2026 को की।
देव प्रसाद वर्मा की जमीन दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड के रायगढ़ क्षेत्र में अधिग्रहित की गई थी। रोजगार की मांग को लेकर उन्होंने पहले याचिका दायर की थी। 19 अगस्त 2025 को कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि 19 दिसंबर 2003 की अधिसूचना के अनुसार रोजगार के लिए जमीन पर 20 साल से अधिक समय तक निरंतर कब्जे की शर्त पूरी नहीं होती।
समीक्षा याचिका में वर्मा की ओर से कहा गया कि जमीन अधिग्रहण के समय वर्ष 2005 की नीति लागू थी और उसमें लगातार 20 साल के स्वामित्व जैसी शर्त नहीं थी। उनका तर्क था कि कोर्ट को 25 सितंबर 1991 की नीति पर भी विचार करना चाहिए था।
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दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड की ओर से इसका विरोध किया गया। बताया गया कि जमीन का अधिग्रहण 13 अप्रैल 2006 के अवार्ड से पहले हो चुका था। उस समय 25 सितंबर 1991 की नीति लागू थी और बाद में 19 दिसंबर 2003 की अधिसूचना आई थी। साथ ही रोजगार का दावा स्वयं याचिकाकर्ता के लिए नहीं, बल्कि उनके दामाद के लिए किया गया था, जो संबंधित नीति के तहत स्वीकार्य नहीं था।
हाई कोर्ट ने पाया कि समीक्षा में उठाए गए आधार मूल याचिका में नहीं उठाए गए थे। जमीन का अधिग्रहण 13 अप्रैल 2006 से पहले हो चुका था और उस समय 25 सितंबर 1991 की नीति लागू थी।
दामाद के लिए रोजगार का दावा भी नीति के अनुसार मान्य नहीं था। कोर्ट ने कहा कि आदेश में ऐसी कोई स्पष्ट गलती नहीं है, जिसके आधार पर समीक्षा अधिकार का इस्तेमाल किया जाए। इसके साथ ही समीक्षा याचिका खारिज कर दी गई।