• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

बहू पर रील बनाने और अभद्र कमेंट्स से उपजा विवाद: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ससुराल पक्ष की FIR की निरस्त

बिलासपुर हाई कोर्ट ने इंस्टाग्राम रील और अभद्र कमेंट्स के विवाद के बाद दर्ज कराई गई दहेज प्रताड़ना की एफआईआर को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया...और पढ़ें

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 14 Aug 2026 09:54:17 AM (IST)Updated Date: Fri, 14 Aug 2026 11:35:19 AM (IST)
बहू पर रील बनाने और अभद्र कमेंट्स से उपजा विवाद: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ससुराल पक्ष की FIR की निरस्त
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की दहेज प्रताड़ना मामले में सख्त टिप्पणी।
  2. सामान्य और अस्पष्ट शिकायतों पर लगाई रोक।
  3. बिना ठोस भूमिका के रिश्तेदारों को फंसाना अनुचित।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच इंस्टाग्राम रील पर आए आपत्तिजनक कमेंट्स को लेकर उपजे विवाद और दर्ज कराई गई दहेज प्रताड़ना की एफआईआर को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने रायगढ़ निवासी पति और उसके परिवार के खिलाफ पचपेड़ी थाने में दर्ज मामले को रद्द करते हुए यह कड़ा संदेश दिया है कि पारिवारिक मनमुटाव में पूरे परिवार को घसीटना कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग है।

क्या है पूरा मामला

प्रकरण के अनुसार, रायगढ़ निवासी आकाश तिवारी का विवाह 22 मई 2025 को शिवानी तिवारी के साथ हुआ था। शादी के महज पाँच महीने बीतने के बाद पत्नी अपने मायके चली गई और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि ससुराल पक्ष द्वारा 8 से 10 लाख रुपये नकद और नेक्सॉन कार की माँग की जा रही थी।


ससुराल पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस पूरे विवाद की असली जड़ पत्नी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर रील बनाना और उन पर आने वाले अभद्र व आपत्तिजनक कमेंट्स थे, जिसको लेकर घर में अनबन शुरू हुई थी।

यह भी पढ़ें- ईडी की 80 करोड़ की कुर्की पर बड़ा झटका मोक्षित कार्पोरेशन की याचिका छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने की खारिज

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मामले की एफआईआर और चार्जशीट का बारीकी से अवलोकन किया। कोर्ट ने पाया कि ससुर, सास और देवर के खिलाफ याचिका में कोई भी विशिष्ट घटना या ठोस भूमिका का जिक्र नहीं किया गया है, बल्कि केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप मढ़े गए हैं।

न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मामूली पारिवारिक मनमुटाव या आपसी असंतोष को आपराधिक मुकदमों में तब्दील करने के लिए बिना पुख्ता और विशिष्ट आरोपों के पूरे परिवार को आरोपी बनाना कानून का दुरुपयोग है। कोर्ट के इस फैसले से पति और उसके परिजनों को बड़ी राहत मिली है।