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सहकारी बैंकों का पैसा पहुंचा आरबीआई के 'डेफ' फंड में, क्या आपका भी पैसा अटका है? ऐसे करें चेक

बिलासपुर में 10 साल से बंद पड़े 1.11 लाख बैंक खातों की 28 करोड़ रुपये की राशि आरबीआई के डेफ फंड में चली गई है। बैंक प्रबंधन ने लोगों से अपनी पुरानी पा...और पढ़ें

By kranti namdevEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 14 Jul 2026 01:13:47 PM (IST)Updated Date: Tue, 14 Jul 2026 01:13:47 PM (IST)
सहकारी बैंकों का पैसा पहुंचा आरबीआई के 'डेफ' फंड में, क्या आपका भी पैसा अटका है? ऐसे करें चेक
आरबीआई

HighLights

  1. बैंक प्रबंधन ने पुरानी पासबुक खंगालने और नाम जांचने की सलाह दी।
  2. आरबीआई के 'उद्गम' पोर्टल से जानें अपने बंद खातों का हाल।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक खाते निष्क्रिय पाए गए।

नईदुनिया प्रतिनिधि,बिलासपुर। जिला सहकारी केंद्रीय केंद्रीय बैंक सहित क्षेत्र की विभिन्न बैंक शाखाओं में 28 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं। बैंकों द्वारा जारी ताजा सूची के अनुसार, कुल 1 लाख 11 हजार ऐसे खाते चिह्नित किए गए हैं, जिनमें पिछले 10 वर्षों से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। इन खातों में जमा राशि को लावारिस घोषित कर दिया गया है। प्रक्रिया के बाद यह भारी भरकम राशी आरबीआई के खाते में ट्रांसफर किए गए है।

निष्क्रिय खातों में जमा लगभग 28 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के अनुसार डेफ (जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता कोष) के तहत ट्रांसफर कर दिया गया है। बैंकों ने इन खाताधारकों के नाम और पते की सूची जारी की है, ताकि लोग अपने फंसे हुए पैसे को वापस पा सकें। प्रशासन और बैंक प्रबंधन ने आम जनता से अपनी पुरानी पासबुक और खातों की जांच करने की अपील की है।


बिलासपुर जिले के साथ ही मुंगेली, जांजगीर-चांपा और सक्ती क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के नाम अनक्लेम्ड सूची में शामिल हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में बैंक की सभी 625 शाखाओं में यह व्यवस्था संचालित की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण लावारिस खातों की संख्या सबसे अधिक है। कई सहकारी समितियों और महिला स्व-सहायता समूहों के खाते भी वर्षों से अपरिचालित स्थिति में पड़े हुए हैं।

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रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, यदि कोई हितग्राही या वैध उत्तराधिकारी अपनी जमा पूंजी पर दोबारा हक जताता है, तो उनसे पहले केवायसी अपडेट करवा कर न्यूनतम राशि जमा करवाई जाती है। संतुष्टि होने के बाद खाताधारक को रकम लौटा दी जाती है, जिसे बाद में आरबीआई से पत्राचार कर बैंक वापस प्राप्त कर लेता है।

क्यों लावारिस हो जाते हैं खाते

अक्सर लोग नौकरी या शहर बदलने के बाद अपने पुराने बैंक खातों को बंद करना भूल जाते हैं। इसके अलावा मुख्य खाताधारक की असमय मृत्यु होने और परिजनों या नामिनी को उस जमा पूंजी की जानकारी न होने के कारण भी बड़ी रकम बैंकों में ही डंप रह जाती है। इस सूची में स्थानीय रिहायशी इलाकों के पते प्रमुखता से शामिल हैं।

ऐसे वापस पा सकते हैं अपना पैसा

आरबीआई ने आम जनता की सुविधा के लिए उद्गम पोर्टल की शुरुआत की है। नागरिक पोर्टल पर जाकर या संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर अनक्लेम्ड डिपाजिट सेक्शन में अपना नाम और पता दर्ज कर खोज सकते हैं। यदि सूची में नाम मिलता है, तो बैंक में उचित केवाईसी दस्तावेज जमा कर राशि वापस ली जा सकती है।

वर्जन --

बैंक की सभी 625 शाखाओं में 10 साल से निष्क्रिय 1.11 लाख खातों की 28 करोड़ राशि डेफ में है। हितग्राहियों के आने पर पहले केवायसी अपडेट कर खाता एक्टिव किया जाता है। संतुष्टि के बाद रकम लौटाकर हम आरबीआई से पत्राचार कर राशि वापस प्राप्त कर लेते हैं।

प्रभात मिश्रा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर