
नईदुनिया न्यूज, सूरजपुर: बीजापुर के रोड ओपनिंग कैंप सेंड्रा में ड्यूटी के दौरान सीने में गोली लगने से छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के आरक्षक बिजेंद्र ठाकुर (42) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर शुक्रवार को उनके गृहग्राम देवनगर में आक्रोश भड़क उठा। बटालियन के जवान जब दो दिन बाद बिजेंद्र का शव लेकर गांव पहुंचे तो स्वजनों और ग्रामीणों ने मौत को आत्महत्या मानने से साफ इनकार कर दिया। जवान की मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई गई और शव को कृष्णपुर-तारा मार्ग पर रखकर करीब पांच घंटे तक चक्काजाम किया गया। इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
सूरजपुर जिले के देवनगर निवासी बिजेंद्र ठाकुर पिता लालजी ठाकुर छठवीं बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल रायगढ़ में आरक्षक के पद पर पदस्थ थे। वर्तमान में उनकी ड्यूटी बीजापुर जिले के रोड ओपनिंग कैंप सेंड्रा में लगी थी। स्वजनों के अनुसार वह करीब पखवाड़े भर पहले ही अवकाश समाप्त होने के बाद ड्यूटी पर लौटे थे।
बुधवार तड़के तीन से सुबह छह बजे तक उनकी रोड ओपनिंग कैंप में ड्यूटी थी। ड्यूटी समाप्त होने के बाद पहुंचे जवान ने बिजेंद्र को कैंप में मृत अवस्था में पड़ा देखा। उनके सीने में गोली लगी थी। घटना की सूचना तत्काल अधिकारियों को दी गई। इसके बाद स्वजनों को बिजेंद्र द्वारा गोली मारकर आत्महत्या किए जाने की जानकारी दी गई। हालांकि स्वजन घटना की परिस्थितियों और मिली जानकारी को लेकर संतुष्ट नहीं हैं।
उनका कहना है कि घटना के पहले दिन रात में बिजेंद्र ने अपनी पत्नी से सामान्य रूप से पारिवारिक बातचीत की थी। ऐसे में अचानक आत्महत्या करने की बात उन्हें स्वीकार नहीं हो रही है। स्वजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर मौत की वास्तविक वजह सामने लाने और हत्या की आशंका की जांच की मांग की।
शुक्रवार सुबह शव देवनगर पहुंचते ही ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर सुबह करीब साढ़े नौ बजे चक्काजाम शुरू कर दिया। आंदोलनकारियों का कहना था कि ड्यूटी के दौरान जवान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई, इसके बावजूद शव दो दिन बाद बटालियन के जवानों के माध्यम से घर पहुंचाया गया और मौके पर किसी वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी नहीं रही। इससे भी स्वजनों में नाराजगी थी।
आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मामले की एसआइटी से जांच कराने और समय सीमा में जांच पूरी करने की मांग की। इसके अलावा मृत जवान को बलिदानी का दर्जा देने, परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा, पत्नी को शासकीय नौकरी तथा दोनों छोटे बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी शासन द्वारा उठाने की मांग रखी गई।
चक्काजाम में मृत जवान के पिता लालजी ठाकुर, मां सरिता ठाकुर, कांग्रेस नेता नरेश राजवाड़े, पंकज तिवारी, भाजपा नेता दीपक गुप्ता, अनिल साहू, सरपंच प्रतिनिधि अक्षय सिंह, पूर्व सरपंच शिवबचन सिंह, विकास गुप्ता, विक्रमा प्रसाद, इश्तियाक और हरिचरन राजवाड़े सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।
सूचना मिलने पर रामानुजनगर एसडीएम अजय मोड़ियम मौके पर पहुंचे। उनके साथ सीएसपी बर्नाड कुजूर, उप निरीक्षक एसआर भगत सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से चर्चा कर उनकी मांगों से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराने तथा नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और करीब पांच घंटे बाद चक्काजाम समाप्त किया।
चक्काजाम समाप्त होने के बाद ग्रामीणों ने जवान के शव पर राष्ट्रीय ध्वज चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद देवनगर मुक्तिधाम में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे गांव में शोक का माहौल रहा।
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